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‘प्रभु’ ने भर दी संगमनगरी की झोली
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Fri, 27 Feb 2015 01:10 AM IST
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इलाहाबाद। मोदी सरकार के पहले पूर्ण बजट में रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने संगम नगरी की झोली भर दी। नए रेल बजट में शहर को तीन बड़े प्रोजेक्ट मिले हैं। इसमें मुगलसराय से इलाहाबाद के बीच तीसरी लाइन, इलाहाबाद में रेल बाईपास और वाराणसी-माधो सिंह-इलाहाबाद रेलमार्ग के दोहरीकरण का ऐलान किया गया है। इन कार्यों के पूरा होने पर इलाहाबाद जंक्शन से जुड़ी ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी। साथ ही इलाहाबाद के आसपास यात्रियों को घंटों परेशान नहीं होना पड़ेगा। इनके पूरा होने से दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेलमार्ग पर यात्री ट्रेनों की संख्या भी बढ़ाई जा सकेगी। साथ ही बीना-झांसी-मथुरा के 426 किमी लंबे सेक्शन में भी तीसरी लाइन और मथुरा-पलवल के बीच 80 किमी की चौथी लाइन स्वीकृत की गई है।
इलाहाबाद जंक्शन पर ट्रेनों की भीड़ है। ट्रैक खाली न होने के कारण छिवकी, बमरौली, झूंसी और फाफामऊ से जंक्शन तक पहुंचने में ट्रेनों को एक से डेढ़ घंटे तक लग रहे हैं। रेलवे बोर्ड भी तमाम प्रयासों के बाद इस समस्या को सुलझा नहीं सका। उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन भी कई सालों से प्रयास में जुटा था लेकिन पहली बार इसके लिए गंभीर प्रयास हुए। ‘प्रभु’ ने एक झटके में ही पुराना संकट दूर करने का रास्ता साफ कर दिया। इसके लिए मुगलसराय से इलाहाबाद तक 152 किमी लंबी तीसरी लाइन का तोहफा दिया। इस पर करीब 2380 करोड़ रुपये खर्च के अनुमान हैं।
वाराणसी-माधो सिंह-इलाहाबाद के बीच 122 किमी लंबे रेलमार्ग के दोहरीकरण पर 1250 करोड़ रुपये खर्च अनुमानित है। दोनों धार्मिक शहरों को जोड़ने का यह सबसे छोटा रेलमार्ग है। इस रूट के विद्युतीकरण के कार्य पिछले वर्ष घोषित हुए थे। अगले कुछ महीनों में कार्य शुरू होने वाले हैं। दोनों कार्य पूरे होने के बाद साढ़े तीन घंटे का सफर डेढ़ घंटे में पूरा होने की संभावना है। इलाहाबाद जंक्शन को बड़ी राहत बाईपास से मिलेगी। इटावा, मुगलसराय के लिए भी बाईपास स्वीकृत किए गए हैं। एनसीआर महाप्रबंधक का दावा है कि बाईपास से मालगाड़ियों को निकाला जाएगा। इससे जंक्शन पर मालगाड़ियों का दबाव कम होगा तो यात्रियों को सहूलियत मिलेगी।
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इलाहाबाद जंक्शन पर ट्रेनों की भीड़ है। ट्रैक खाली न होने के कारण छिवकी, बमरौली, झूंसी और फाफामऊ से जंक्शन तक पहुंचने में ट्रेनों को एक से डेढ़ घंटे तक लग रहे हैं। रेलवे बोर्ड भी तमाम प्रयासों के बाद इस समस्या को सुलझा नहीं सका। उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन भी कई सालों से प्रयास में जुटा था लेकिन पहली बार इसके लिए गंभीर प्रयास हुए। ‘प्रभु’ ने एक झटके में ही पुराना संकट दूर करने का रास्ता साफ कर दिया। इसके लिए मुगलसराय से इलाहाबाद तक 152 किमी लंबी तीसरी लाइन का तोहफा दिया। इस पर करीब 2380 करोड़ रुपये खर्च के अनुमान हैं।
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वाराणसी-माधो सिंह-इलाहाबाद के बीच 122 किमी लंबे रेलमार्ग के दोहरीकरण पर 1250 करोड़ रुपये खर्च अनुमानित है। दोनों धार्मिक शहरों को जोड़ने का यह सबसे छोटा रेलमार्ग है। इस रूट के विद्युतीकरण के कार्य पिछले वर्ष घोषित हुए थे। अगले कुछ महीनों में कार्य शुरू होने वाले हैं। दोनों कार्य पूरे होने के बाद साढ़े तीन घंटे का सफर डेढ़ घंटे में पूरा होने की संभावना है। इलाहाबाद जंक्शन को बड़ी राहत बाईपास से मिलेगी। इटावा, मुगलसराय के लिए भी बाईपास स्वीकृत किए गए हैं। एनसीआर महाप्रबंधक का दावा है कि बाईपास से मालगाड़ियों को निकाला जाएगा। इससे जंक्शन पर मालगाड़ियों का दबाव कम होगा तो यात्रियों को सहूलियत मिलेगी।
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