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झांसी में रुका है टिड्डी दल, खतरा बरकरार

Mon, 25 May 2020 04:13 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो Updated Mon, 25 May 2020 04:13 PM IST
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locust group threat
Grasshopper - फोटो : Social Media
कोरोना महामारी के बीच टिड्डियों के दल के हमले की आशंका बनी हुई है। टिड्डियों का दल झांसी में तीन टुकड़ों में बंटने के साथ दो दिनों से वहां रुका है। ऐसे में कुछ राहत की बात जरूर कही जा रही है लेकिन खतरा अब भी बना हुआ है और हवा ने साथ नहीं दिया तो उनके यहां दो से तीन दिनों में पहुंचने की आशंका बनी हुई है। इसके अलावा इनके पीछे भी टड्डियों के कई दल हैं, जिनके भी यहां पहुंचाने का खतरा बना हुआ है।
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पाकिस्तान से निकला टिड्डियों का दल रविवार को ही झांसी तक पहुंच गया। वहां दवाओं के छिडक़ाव के बाद उन्हें तीन टुकड़ों में बांटने में सफलता मिली। इनमें से दो दल मध्य प्रदेश की तरफ घूम गए हैं लेकिन एक दल अब भी झांसी में डेरा डाले हुए है। इसके यहां आने की आशंका को नकारा नहीं जा सकता।
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उप निदेशक कृषि विनोद कुमार का कहना है कि टिड्डियों का दल हवा के साथ चलता है। यदि हवा का रुख इधर की ओर रहा तो उनके यहां दो से तीन दिन में आने आशंका है। इसे देखते हुए फायर ब्रिगेड की गाडिय़ों, टैंकर, दवाओं आदि का इंतजाम कर लिया गया है। ग्रामीणों को भी जागरूक किया जा रहा है।

झांसी से पीछे भी सक्रिय हैं कई दल

खतरा सिर्फ झांसी तक पहुंच चुके टिड्डियों के दल से नहीं है। इनके पीछे भी कई दल सक्रिय हैं। उप निदेशक कृषि का कहना है कि राजस्थान, पंजाब में टिड्डियों के अन्य दल भी हैं। उनके भी यहां आने का खतरा बना है। इसे देखते हुए पूरी तैयारी की गई है। केंद्रीय टीम हर दल के साथ चल रही है। इसके अलावा जिला स्तर पर भी प्रशासन की ओर से दवाओं का छिडक़ाव तथा अन्य कार्रवाइयां की जा रही हैं। इसी परिपेक्ष्य में यहां भी पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।

थाली-ढोल बजाने के साथ दवाओं का करें छिडक़ाव

टिड्डियों से फसलों के बचाव के लिए ग्रामीणों को भी जागरूक किया जा रहा है। टिड्डी शाम होते ही खेतों, पेड़ों (जहां हरी पत्तियां या फसल हो) पर उतरने लगते हैं। ऐसे में उनका हमला होने पर ग्रामीणों को जगह-जगह एकत्रित होकर ढोल, थाली आदि बजाने की सलाह दी गई है। ढोल, थाली आदि की आवाज से टिड्डी खेतों में नहीं उतरेंगे। जिला कृषि अधिकारी अश्वनी कुमार सिंह ने बताया कि कई तरह की दवाओं के छिडक़ाव से भी फसलों को उनसे बचाया जा सकता है। किसानों को उन दवाओं के छिडक़ाव की सलाह दी जा रही है।

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