फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   live broadcasting of cases is nesessary to present partiality of judiciary

न्यायपालिका की पारदर्शिता के लिए जरूरी है मुकदमों का सीधा प्रसारण

Tue, 27 Oct 2020 08:23 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 27 Oct 2020 08:23 PM IST
विज्ञापन
live broadcasting of cases is nesessary to present partiality of judiciary
live broadcasting of cases is nesessary to present partiality of judiciary
प्रयागराज। अदालत में मुकदमे की सुनवाई हो रही हो और आप अपने घर पर बैठ कर उसे देख रहे हों, अपने वकील की बहस, जज का फैसला सबकुछ। जैसे आप की आंखों के सामने हो रहा हो। इससे बेहतर क्या हो सकता है।
विज्ञापन

गुजरात हाईकोर्ट की इस पहल को इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों ने भी सराहा है। सभी चाहते हैं कि मुकदमों के सीधे प्रसारण की व्यवस्था हो। अगर ऐसा संभव न हो तो कम से कम कोर्ट कार्यवाही की रिकार्डिंग तो जरूर हो। ताकि बाद में वादकारी और वकील जरूरत पड़ने पर उसे देख सकें।
विज्ञापन

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरेंद्र नाथ सिंह कहते हैं दुनिया के कई विकसित देशों में यह व्यवस्था लागू है। इसकी मांग यहां भी चल रही है कि मुकदमों के सीधे प्रसारण की व्यवस्था हो। ऐसा होना से एक तो अदालत की कार्यवाही में पारदर्शिता आएगी, दूसरे वादकारी भी जान सकेंगे कि उनके वकील ने किस तरह से मुकदमे में पक्ष रखा। इससे वकीलों की योग्यता भी कसौटी पर कसी जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील अदालतों में कैमरा लगाने की मांग काफी समय से कर रहे हैं। हालांकि हर एक मुकदमे की सुनवाई का सीधा प्रसारण करने को लेकर लोग एकमत नहीं है। यह भी कहा जा रहा है कि महत्वपूर्ण मुकदमों के लाइव प्रसारण की व्यवस्था की जा सकती है।
जबकि बार कौंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन व पूर्व महाधिवक्ता वीसी मिश्र का कहना है कि न्याय छिप कर नहीं खुल कर होना चाहिए। हमारे यहां न्याय प्रणाली पंचायतों से शुरू हुई। पंचायतें सार्वजनिक स्थान पर लगाई जाती हैं। जहां कोई भी मौजूद रह सकता है। मुकदमों की लाइव सुनवाई होने से बार और बेंच दोनों का व्यवहार संतुलित रहेगा। काम में पारदर्शिता आएगी। यह वादकारियों और आम जनता के हित है।
वहीं पूर्व अध्यक्ष राकेश पांडेय बताते हैं कि वकीलों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए गठित सात सदस्यीय बेंच के सामने कोर्ट रूम में कैमरा लगवाने की मांग बार एसोसिएशन की ओर से उठाई गई थी। मुकदमों की सुनवाई के लाइव प्रसारण से कोई हर्ज नहीं है। अब इस व्यवस्था को इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को देखते हुए शुरूआती दिनों में सीमित तरीके से लागू किया जा सकता है।
हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लाइव प्रसारण की व्यवस्था की अनुमति नहीं दी है मगर वकीलों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों यहां भी लाइव प्रसारण की व्यवस्था लागू हो सकेगी। वकील मानते हैं कि इस व्यवस्था पूरी तरह से परिपक्व होने तक सीमित दायरे में भी अपनाई जा सकती है।
2018 में सुप्रीमकोर्ट ने दी थी अनुमति
सर्वोच्च न्यायालय ने 26 सितंबर 2018 को स्वप्निल त्रिपाठी केस में न्यायालय की कार्यवाही के सीधे प्रसारण पर सहमति जताई थी। सर्वोच्च अदालत का कहना था कि सांविधानिक या राष्ट्रीय महत्व के मुकदमों की सुनवाई के सीधे प्रसारण की अनुमति दी जा सकती है।

प्रयागराज के ही हैं जस्टिस विक्रम नाथ
गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विक्रमनाथ, जिन्होंने मुकदमों के सीधे प्रसारण की व्यवस्था लागू की, का नाता प्रयागराज से है। यहीं पढ़े बढ़े जस्टिस विक्रमनाथ ने अपनी वकालत की शुरूआत इलाहाबाद हाईकोर्ट से की और यहीं पर जज भी नियुक्त हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed