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हाईकोर्ट : नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपियों की उम्रकैद की सजा रद, आरोप साबित नहीं कर सका अभियोजन

Fri, 20 Oct 2023 04:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 20 Oct 2023 04:39 PM IST
सार

आरोप है कि आठ जनवरी 2015 की शाम को 15 वर्षीय पीड़िता खेत गई थी, जहां उसे पकड़कर आरोपियों ने बारी-बारी दुष्कर्म किया। पीड़िता खून से लतपथ हालत में अपने चाचा के घर पहुंची और उन्हें घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद चाचा ने पीड़िता के पिता को मामले की सूचना दी। इसके बाद पिता ने थाने में मामला दर्ज कराया और पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की।

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Life imprisonment of those accused of raping a minor cancelled, prosecution could not prove the charges.
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म पीड़िता के बयान पर ही अभियुक्त को सजा दी जा सकती है, बशर्ते बयान विश्वसनीय व सत्य प्रतीत होता हो। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के बयान का समर्थन मेडिकल व अन्य साक्ष्यों द्वारा भी होना चाहिए। इसी आधार पर कोर्ट ने शाहजहांपुर के गड़हिया रंगीन थाना क्षेत्र में जनवरी में गेहूं काटने खेत गई 15 वर्षीय किशोरी से पिस्टल की नोक पर दुष्कर्म करने के आरोपियों की उम्र कैद की सजा रद कर दी। इसके साथ ही उन्हें रिहा करने का आदेश दिया है।

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यह फैसला न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने अनमोल व पप्पू की सजा के खिलाफ दाखिल अपील को स्वीकार करते हुए दिया है। अपील में अपर सत्र अदालत शाहजहांपुर द्वारा दुष्कर्म के आरोप में उम्रकैद व 75 हजार रुपये जुर्माने व पाक्सो एक्ट के अपराध में 15 साल की कैद व 25 हजार रुपये जुर्माने की एक साथ चलने वाली सजा को चुनौती दी गई थी।

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आरोप है कि आठ जनवरी 2015 की शाम को 15 वर्षीय पीड़िता खेत गई थी, जहां उसे पकड़कर आरोपियों ने बारी-बारी दुष्कर्म किया। पीड़िता खून से लतपथ हालत में अपने चाचा के घर पहुंची और उन्हें घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद चाचा ने पीड़िता के पिता को मामले की सूचना दी। इसके बाद पिता ने थाने में मामला दर्ज कराया और पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की।

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पीड़िता ने बताया उसे नहीं नहीं मालूम चोट लगी या नहीं

किसी चोट के बारे में पूछे जाने पर पीड़िता ने बताया कि उसे नहीं मालूम कि चोट लगी या नहीं। मेडिकल रिपोर्ट में कोई चोट नहीं पाई गई है। कपड़े पर खून की फारेंसिक जांच रिपोर्ट नहीं है। कहा, कुर्ती खून से भीगी थी। मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया गुप्तांग से खून बहना नहीं पाया गया। वह यह भी नहीं बता सकती कि देशी पिस्टल कितनी लंबी थी और जनवरी में गेहूं की फसल पकी नहीं होती। इसलिए गेहूं काटने गई थी, सही नहीं है।


घर से खेत की दूरी नहीं बता सकती। साइट प्लान पीड़िता ने नहीं उसके पिता ने बनवाया, जो चश्मदीद नहीं थे। खेत में शोर के बावजूद कोई बचाने नहीं आया। वास्तव में ऐसी कोई घटना ही नहीं हुई। कुछ पारिवारिक विवाद चल रहा है। झूठा फंसाया गया है। कोर्ट ने कहा पीड़िता का साक्ष्य नैसर्गिक व सत्य नहीं प्रतीत होता है। कोर्ट ने कहा विवेचना सही तरीके से नहीं की गई।


सजा पीड़िता के बयान पर सुनाई गई है। ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषी करार देने का निष्कर्ष बने रहने लायक नहीं है। अपराध संदेह से परे साबित करने में अभियोजन विफल रहा है। कोर्ट ने सजा रद करते हुए अपराध से बरी कर दिया है।

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