हाईकोर्ट : आजीवन कारावास की सजा 10 वर्ष के कठोर कारावास में तब्दील, अन्य आरोपियों को भी किया बरी
अभियोजन पक्ष के अनुसार श्याम शंकर मिश्रा ने अपनी बेटी सुधा की शादी आरोपी अखिलेश कुमार मिश्रा से की थी। आरोपी अखिलेश कुमार मिश्रा मोटरसाइकिल और प्लॉट की मांग कर रहा था। पूरी न होने पर बेटी को जान से मारने की धमकी दे रहा था।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के दोषी की आजीवन कारावास की सजा को कम करते हुए 10 साल के कठोर कारावास में तब्दील कर दिया है। वहीं अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। याची के अधिवक्ताओं अनूप त्रिवेदी, अधिवक्ता राम सिंह कुशवाह और अधिवक्ता सर्वेश को सुनने के बाद न्यायमूर्ति सिद्धार्थ तथा न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की कोर्ट ने उक्त फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार श्याम शंकर मिश्रा ने अपनी बेटी सुधा की शादी आरोपी अखिलेश कुमार मिश्रा से की थी। आरोपी अखिलेश कुमार मिश्रा मोटरसाइकिल और प्लॉट की मांग कर रहा था। पूरी न होने पर बेटी को जान से मारने की धमकी दे रहा था।
उनके फूफा जगदानंद झा भी धमकी देते थे। इस बीच 19 जुलाई 1994 को बेटी सुधा की हत्या कर दी गई। इस बारे में थाना-काकादेव, जिला कानपुर नगर में दहेज हत्या सहित संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी अखिलेश कुमार मिश्रा को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही बुआ मीरा झा और फूफा जगदानंद झा को दोषी करार देते हुए आठ वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई। याची के अधिवक्ता ने कहा,पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विसरा रिपोर्ट में मृतक को जहर देने की बात सामने नहीं आई है। साथ ही अन्य कई तथ्य रखे। वहीं, शासकीय अधिवक्ता ने कहा, भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के अनुसार सुबूत का भार आरोपी व्यक्ति पर था कि वह यह बताए कि उनके घर में रहते हुए सुधा की मृत्यु कैसे हुई। इसके साथ ही अन्य कई तर्क दिए। कोर्ट ने दलीलों को सुनने के बाद याची अखिलेश कुमार मिश्रा की आजीवन कारावास की सजा को 10 वर्ष के कठोर कारावास में बदल दिया। वहीं, आरोपी जगदानंद झा और श्रीमती मीरा झा को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।