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हाईकोर्ट का अहम फैसला : बालिग समलैंगिक जोड़े को साथ रहने का अधिकार, परिवार या समाज नहीं डाल सकता बाधा

Sun, 20 Sep 2026 01:31 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 20 Sep 2026 01:31 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बालिग समलैंगिक जोड़े को अपनी पसंद के साथी के साथ सहमति से रहने का संवैधानिक अधिकार है। परिवार या समाज की नाराजगी के आधार पर उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सुरक्षा के अधिकार में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

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Lesbian couples have right live together allahabad high court said
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर बालिग को अपनी पसंद का साथी चुनने, व्यक्तिगत स्वायत्तता बनाए रखने और सहमति से साथ रहने का अधिकार है। सामाजिक विरोध, पारंपरिक मान्यताओं या परिवार की नाराजगी के आधार पर किसी की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

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यह टिप्पणी इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी की एकल पीठ वाराणसी की दो बालिग युवतियों के समलैंगिक लिव-इन संबंध से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान की। दोनों युवतियों ने सुरक्षा की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में बताया कि दोनों बालिग और अविवाहित हैं। अपनी इच्छा से साथ रह रही हैं। दोनों अलग-अलग धर्मों से संबंध रखती हैं। याचियों का आरोप था कि नाराज परिजन और रिश्तेदार उनके शांतिपूर्ण जीवन में बाधा डाल रहे हैं। उन्हें खतरा है।
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पूर्व आदेश के अनुपालन में दोनों युवतियां अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुईं। कोर्ट ने उनसे अलग-अलग बातचीत कर उनके बयान दर्ज किए। दोनों ने स्पष्ट किया कि वे बालिग हैं। अपने फैसले के परिणामों को समझने में सक्षम हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वे बिना किसी भय, दबाव या अनुचित प्रभाव के अपनी इच्छा से साथ रह रही हैं। भविष्य में भी इसी तरह रहना चाहती हैं।

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राज्य की दलील-समाज के बड़े वर्ग में समलैंगिक विवाह की स्वीकार्यता नहीं

राज्य की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि समलैंगिक संबंधों को समाज के एक बड़े पारंपरिक वर्ग में स्वीकार्यता नहीं मिली है। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने का प्रश्न अलग है। विवाह का वैधानिक दर्जा न होने से दो बालिग व्यक्तियों के सहमति से साथ रहने और उनकी सुरक्षा के अधिकार प्रभावित नहीं होते।

पुलिस को सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश

कोर्ट ने कहा कि दोनों युवतियों को शांतिपूर्वक साथ रहने की स्वतंत्रता है और परिवार या अन्य व्यक्ति उनके संबंध में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। किसी तरह की बाधा उत्पन्न होने पर वे आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ संबंधित पुलिस आयुक्त, एसएसपी या एसपी से संपर्क कर सकती हैं। पुलिस को उनकी बालिग होने की पुष्टि के बाद आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।

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