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कुर्मी वोटरों पर डोरे डालेंगे नीतीश
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 06 Jul 2016 01:09 AM IST
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नीतीश कुमार
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की फूलपुर में प्रस्तावित जनसभा ने प्रतिद्वंद्वियों की बेचैनी बढ़ा दी है। एक तरफ भाजपा ने अनुप्रिया सिंह पटेल को स्वास्थ्य राज्यमंत्री बनाकर कुर्मी वोटरों को साधने की कोशिश तेज कर दी है तो दूसरी ओर 17 जुलाई को फूलपुर में होने वाली जनता दल यूनाईटेड (जदयू) की जनसभा में भी नीतीश कुमार कुछ ऐसा ही लक्ष्य लेकर जनता के सामने होंगे। कुर्मी वोटरों पर मजबूत पकड़ का दावा करने वाले अपना दल में अंतकर्लह का भी जदयू फायदा उठाने की कोशिश में है।
अनुप्रिया सिंह पटेल और उनकी मां कृष्णा पटेल के बीच उपजे विवाद और पार्टी में बंटवारे के बाद कुर्मी वोटरों पर अपना दल की पकड़ ढीली पड़ी है। लोकसभा चुनाव में अपना दल से सिर्फ दो सांसद चुने गए थे, जिनमें अनुप्रिया और प्रतापगढ़ से हरिवंश सिंह शामिल हैं। पार्टी में बंटवारे के बाद हरिवंश ने कृष्णा पटेल का गुट का पकड़ लिया। हरिवंश अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष भी हैं, सो कई और मायनों में भी कृष्णा पटेल गुट को हरिवंश का साथ मिलने से फायदा होगा। कृष्णा को उनकी दूसरी बेटी पल्लवी पटेल का भी साथ मिल गया जबकि अनुप्रिया अकेले रह गईं। अब भाजपा ने अनुप्रिया को स्वास्थ्य राज्यमंत्री बनाकर बड़ा दांव खेला है। इलाहाबाद और आसपास के जिलों में कुर्मी वोटरों के बीच अनुप्रिया का खासा प्रभाव माना जाता है, जिसमें अब जदयू ने सेंध लगाने की तैयारी कर ली है। अंदरखाने चर्चा यह भी है कि कृष्णा पटेल गुट और जदयू एक-दूसरे से हाथ मिलाने की तैयारी में हैं लेकिन कोई भी नेता इस पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।
जदयू ने कुर्मी वोटों में सेंध लगाने के लिए बिहार के सीएम नीतीश कुमार की जनसभा के लिए सोची-समझी रणनीति के तहत फूलपुर स्थित भुलई का पुरा मैदान चुना है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सभा स्थल से 35 किलोमीटर की परिधि में तकरीबन तीन लाख कुर्मी वोटर रहते हैं। जिले में कुर्मी वोटरों की संख्या कुल मतदाताओं के मुकाबले तकरीबन सात फीसदी है, जो समीकरण बदलने के लिए काफी है। नीतीश कुमार खुद कर्मी जाति के हैं। उनकी छवि भी साफ-सुथरी है और बिहार में लालू प्रसाद यादव का दामन थामने के बावजूद भाजपा उन पर मौकापरस्त होने का आरोप नहीं लगा सकती है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से हाथ मिलाकर भाजपा खुद घिरी हुई है। अब देखना है कि इन तमाम समीकरणों के बीच नीतीश कुमार अपना दल के परंपरागत वोटों पर सेंध लगा पाने में कितने कामयाब होते हैं।
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनसभा अब 17 जुलाई को होगी। पहले जनसभा 16 जुलाई को प्रस्तावित थी। मंगलवार को सिविल लाइंस स्थित संगम प्लेस में हुई जदयू की बैठक जदयू युवा के जिलाध्यक्ष आशुतोष कुमार सिंह पटेल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने 16 जुलाई को देश के सभी मुख्यमंत्रियों की एक आवश्यक बैठक बुला ली है, जिसकी वजह से 16 को नीतीश कुमार नहीं आएंगे। ऐसे में जनसभा का आयोजन 17 जुलाई को करने का निर्णय लिया गया है। आयोजन के स्थान (फूलपुर स्थित भुलई का पुरा मैदान) और समय में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा ने नीतीश कुमार की फूलपुर में प्रस्तावित जनसभा में उनके जोरदार स्वागत और सभास्थल पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का निर्णय लिया है। मंगलवार को श्याम सुंदर सिंह पटेल की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुर्मी समाज के लोगों से प्रस्तावित जनसभा को सफल बनाने की अपील की गई। बैठक में मान सिंह, हरिश्चंद्र सिंह पटेल, ललिता कटियार, राजेश्वरी पटेल, रीता सिंह पटेल, राम सिंह आदि मौजूद रहे।
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अनुप्रिया सिंह पटेल और उनकी मां कृष्णा पटेल के बीच उपजे विवाद और पार्टी में बंटवारे के बाद कुर्मी वोटरों पर अपना दल की पकड़ ढीली पड़ी है। लोकसभा चुनाव में अपना दल से सिर्फ दो सांसद चुने गए थे, जिनमें अनुप्रिया और प्रतापगढ़ से हरिवंश सिंह शामिल हैं। पार्टी में बंटवारे के बाद हरिवंश ने कृष्णा पटेल का गुट का पकड़ लिया। हरिवंश अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष भी हैं, सो कई और मायनों में भी कृष्णा पटेल गुट को हरिवंश का साथ मिलने से फायदा होगा। कृष्णा को उनकी दूसरी बेटी पल्लवी पटेल का भी साथ मिल गया जबकि अनुप्रिया अकेले रह गईं। अब भाजपा ने अनुप्रिया को स्वास्थ्य राज्यमंत्री बनाकर बड़ा दांव खेला है। इलाहाबाद और आसपास के जिलों में कुर्मी वोटरों के बीच अनुप्रिया का खासा प्रभाव माना जाता है, जिसमें अब जदयू ने सेंध लगाने की तैयारी कर ली है। अंदरखाने चर्चा यह भी है कि कृष्णा पटेल गुट और जदयू एक-दूसरे से हाथ मिलाने की तैयारी में हैं लेकिन कोई भी नेता इस पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।
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जदयू ने कुर्मी वोटों में सेंध लगाने के लिए बिहार के सीएम नीतीश कुमार की जनसभा के लिए सोची-समझी रणनीति के तहत फूलपुर स्थित भुलई का पुरा मैदान चुना है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सभा स्थल से 35 किलोमीटर की परिधि में तकरीबन तीन लाख कुर्मी वोटर रहते हैं। जिले में कुर्मी वोटरों की संख्या कुल मतदाताओं के मुकाबले तकरीबन सात फीसदी है, जो समीकरण बदलने के लिए काफी है। नीतीश कुमार खुद कर्मी जाति के हैं। उनकी छवि भी साफ-सुथरी है और बिहार में लालू प्रसाद यादव का दामन थामने के बावजूद भाजपा उन पर मौकापरस्त होने का आरोप नहीं लगा सकती है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से हाथ मिलाकर भाजपा खुद घिरी हुई है। अब देखना है कि इन तमाम समीकरणों के बीच नीतीश कुमार अपना दल के परंपरागत वोटों पर सेंध लगा पाने में कितने कामयाब होते हैं।
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनसभा अब 17 जुलाई को होगी। पहले जनसभा 16 जुलाई को प्रस्तावित थी। मंगलवार को सिविल लाइंस स्थित संगम प्लेस में हुई जदयू की बैठक जदयू युवा के जिलाध्यक्ष आशुतोष कुमार सिंह पटेल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने 16 जुलाई को देश के सभी मुख्यमंत्रियों की एक आवश्यक बैठक बुला ली है, जिसकी वजह से 16 को नीतीश कुमार नहीं आएंगे। ऐसे में जनसभा का आयोजन 17 जुलाई को करने का निर्णय लिया गया है। आयोजन के स्थान (फूलपुर स्थित भुलई का पुरा मैदान) और समय में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा ने नीतीश कुमार की फूलपुर में प्रस्तावित जनसभा में उनके जोरदार स्वागत और सभास्थल पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का निर्णय लिया है। मंगलवार को श्याम सुंदर सिंह पटेल की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुर्मी समाज के लोगों से प्रस्तावित जनसभा को सफल बनाने की अपील की गई। बैठक में मान सिंह, हरिश्चंद्र सिंह पटेल, ललिता कटियार, राजेश्वरी पटेल, रीता सिंह पटेल, राम सिंह आदि मौजूद रहे।