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पांच महीने तक 615 कोरोना मरीजों का उपचार कर कोटवा-बनी अस्पताल बंद
Thu, 03 Sep 2020 12:28 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 03 Sep 2020 12:28 AM IST
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prayagraj news
- फोटो : prayagraj
पांच महीनों तक कोविड-19 के 615 मरीजों का उपचार करने के बाद कोटवा-बनी लेवल-वन हॉस्पिटल को आठ मरीजों को डिस्चार्ज करने के बाद बंद कर दिया गया। अब वहां कोविड-19 मरीजों को भर्ती नहीं किया जाएगा। अस्पताल में सबसे पहले पांच अप्रैल को पॉजिटिव पाए गए इंडोनेशियाई नागरिक को भर्ती किया गया था। अस्पताल को बंद करने का फैसला शासन स्तर से लिया गया है।
अस्पताल के नोडल इंचार्ज डॉ. वीके मिश्रा ने बताया कि अब सभी मरीजों को शहर के अस्पतालों में ही भर्ती किया जाएगा। शहर में लेवल-वन के कई अस्पताल संचातिल हैं। कोविड केयर सेंटर भी चल रहे हैं। इसके अलावा होम आइसोलेशन की व्यवस्था चलने से अस्पताल को बंद करने का निर्णय शासन स्तर से किया गया। बुधवार को यहां भर्ती आठ मरीजों की छुट्टी कर दी गई। इसके बाद अस्पताल को बंद कर दिया गया।
अस्पताल के डॉ. उत्सव सिंह ने बताया कि पांच महीनों के दौरान यहां कुल 615 मरीज भर्ती हुए। इसमें से हालत खराब होने पर 77 मरीजों को लेवल-टू और लेवल-थ्री कोविड-19 अस्पताल में उपचार के लिए रेफर किया गया। अच्छी बात रही यहां किसी भी कोविड मरीज की मौत नहीं हुई। भर्ती किए गए मरीजों में 506 पुरुष, 109 महिलाएं थीं, जिसमें 15 साल से कम उम्र के 32 बच्चे भी शामिल रहे।
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उन्होंने बताया कि यहां प्रयागराज के अलावा प्रतापगढ़, कौशाम्बी और फतेहपुर के मरीजों को भर्ती किया गया। इन पांच महीनों के दौरान मरीजों के उपचार के लिए कुल 10 टीमों को लगाया गया। नौ टीमें प्रयागराज की रहीं, जबकि फतेहपुर की एक टीम ने काम किया। मरीजों का रिकवरी रेट 85.5 फीसदी रहा। 12.52 फीसदी मरीजों को उच्च श्रेणी के अस्पतालों में रेफर किया गया। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. एएल यादव ने कहा कि यह उनके अस्पताल की उपलब्धि रही कि कोविड से किसी भी मरीज की जान नहीं गई।
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अस्पताल के नोडल इंचार्ज डॉ. वीके मिश्रा ने बताया कि अब सभी मरीजों को शहर के अस्पतालों में ही भर्ती किया जाएगा। शहर में लेवल-वन के कई अस्पताल संचातिल हैं। कोविड केयर सेंटर भी चल रहे हैं। इसके अलावा होम आइसोलेशन की व्यवस्था चलने से अस्पताल को बंद करने का निर्णय शासन स्तर से किया गया। बुधवार को यहां भर्ती आठ मरीजों की छुट्टी कर दी गई। इसके बाद अस्पताल को बंद कर दिया गया।
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अस्पताल के डॉ. उत्सव सिंह ने बताया कि पांच महीनों के दौरान यहां कुल 615 मरीज भर्ती हुए। इसमें से हालत खराब होने पर 77 मरीजों को लेवल-टू और लेवल-थ्री कोविड-19 अस्पताल में उपचार के लिए रेफर किया गया। अच्छी बात रही यहां किसी भी कोविड मरीज की मौत नहीं हुई। भर्ती किए गए मरीजों में 506 पुरुष, 109 महिलाएं थीं, जिसमें 15 साल से कम उम्र के 32 बच्चे भी शामिल रहे।
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उन्होंने बताया कि यहां प्रयागराज के अलावा प्रतापगढ़, कौशाम्बी और फतेहपुर के मरीजों को भर्ती किया गया। इन पांच महीनों के दौरान मरीजों के उपचार के लिए कुल 10 टीमों को लगाया गया। नौ टीमें प्रयागराज की रहीं, जबकि फतेहपुर की एक टीम ने काम किया। मरीजों का रिकवरी रेट 85.5 फीसदी रहा। 12.52 फीसदी मरीजों को उच्च श्रेणी के अस्पतालों में रेफर किया गया। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. एएल यादव ने कहा कि यह उनके अस्पताल की उपलब्धि रही कि कोविड से किसी भी मरीज की जान नहीं गई।