फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Kidnapping and rape case: Police arrested Assistant Professor Madan Yadav of CMP Degree College

अपहरण और दुष्कर्म मामला : पुलिस ने सीएमपी डिग्री कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर मदन यादव को किया गिरफ्तार

Mon, 06 Dec 2021 12:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 06 Dec 2021 12:48 PM IST
सार

र्नलगंज निवासी दुष्कर्म पीड़िता ने सीएमपी डिग्री कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर मदन यादव व चार अज्ञात पर इसी साल 29 सितंबर को मारपीट, धमकी देने समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया था। सुनवाई न होने पर उसने कोर्ट में गुहार लगाई थी और कोर्ट के आदेश पर ही यह केस दर्ज किया गया था।

विज्ञापन
Kidnapping and rape case: Police arrested Assistant Professor Madan Yadav of CMP Degree College
arrest - फोटो : istock

विस्तार

गवाह को दुष्कर्म के केस में फर्जी तरीकेसे जेल भेजने के मामले में आरोपी सीएमपी डिग्री कॉलेज का असिस्टेंट प्रोफेसर मदन यादव गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने शनिवार को उसे थरवई से पकड़ा जिसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया। वहां से उसे मजिस्ट्रेट की अनुमति से जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि उसने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वह इस साजिश में पूरी तरह से शामिल था और बलीपुर निवासी शिवकुमार पटेल के माध्यम से यह खेल किया। शिवकुमार की तलाश की जा रही है।

विज्ञापन


गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने के मामले में 10 नवंबर को जार्जटाउन थाने में तीन नामजद व अन्य अज्ञात पर कुल 14 धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसमें हंडिया के पूर्व इंस्पेक्टर बृजेश यादव, पूर्व सर्विलांस प्रभारी संजय यादव के अलावा असिस्टेंट प्रोफेसर मदन भी नामजद आरोपी बनाया गया था। पुलिस तब से उसकी तलाश में जुटी थी। सोमवार को सटीक सूचना पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, थाने लाकर पूछताछ करने पर उसने इस पूरी साजिश में शामिल होने की बात स्वीकार कर ली है।

विज्ञापन

शिवकुमार के जरिए किय था खेल
साथ ही कई अहम बातों का खुलासा भी किया। बताया कि बलीपुर, हंडिया का प्रॉपर्टी ब्रोकर शिवकुमार पटेल उसके संपर्क में था और उसके ही जरिए उसने यह खेल किया। बताया कि शिवकुमार के कहने पर हंडिया में दुष्कर्म का केस दर्ज कराने वाली महिला ने 164 के बयान में फर्जी तरीके से कर्नलगंज में दर्ज केस के गवाह का नाम बतौर आरोपी लिया। यह भी बताया कि फूलपुर में दर्ज फर्जी केस के पीछे भी शिवकुमार का ही हाथ था। सीओ कर्नलगंज अजीत सिंह चौहान ने बताया कि शिवकुमार की तलाश में टीमें लगा दी गई हैं।

पांच हजार रुपये देने की कही बात
पूछताछ में आरोपी मदन यादव ने पुलिस से कहा कि उसने गवाह को फर्जी तरीकेसे जेल भेजवाने के लिए शिवकुमार को महज पांच हजार रुपये दिए थे। इससे पहले फूलपुर में दर्ज केस के बाबत उसका कहना था कि उसकेलिए उसने ढाई हजार रुपये दिए थे लेकिन इस केस में एफआर लग गई थी। यह पूछने पर कि आखिर पुलिसकर्मी इस फर्जीवाड़े में क्यों शामिल हुए, उसका कहना था कि उसकी परेशानी देखकर और एक ही जाति का होेने केचलते पुलिसकर्मियों को उस पर रहम आ गया और उन्होंने उसकी मदद के लिए ऐसा किया। हालांकि पुलिस अफसरों का मानना है कि वह अभी सच नहीं बोल रहा है। ऐसे में यह राज बना हुआ है कि आखिर पुलिसकर्मी इतने बड़े फर्जीवाड़े में क्यों शामिल हुए।

पन्ना लाल सिपाही ले गया था गवाह को पकड़कर

पूछताछ में मदन यादव ने यह भी बताया है कि किस तरह गवाह को कचहरी के बाहर से उठाकर हंडिया ले जाया गया और फिर उसे फर्जी तरीकेसे जेल भेज दिया गया। बताया कि वह कोर्ट में तारीख पर गया था इसी दौरान उसे अपने केस का गवाह दिखा। इसकेबाद उसके जानकारी देने पर एसओजी का सिपाही पन्नालाल यादव गवाह को पकड़कर थाने ले गया। जहां कुछ देर रखने के बाद उसे अपनी टीम केअन्य लोगों की मदद से हंडिया ले जाकर इंस्पेक्टर को सौंप दिया। इसके बाद हंडिया पुलिस ने उसे फर्जी तरीके से जेल भेज दिया।

पुलिसकर्मियों की कब होगी गिरफ्तारी?

मामले के एक नामजद आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब अन्य आरोपी हंडिया के पूर्व इंस्पेक्टर बृजेश यादव व जार्जटाउन थाने के एसआई बलवंत यादव की भूमिका की जांच चल रही है। सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तारी फर्द में शामिल सभी पुलिसकर्मियों ने पूर्व इंस्पेक्टर बृजेश यादव के खिलाफ बयान दिया है। उधर मामले में सस्पेंड किए गए पूर्व सर्विलांस प्रभारी संजय यादव समेत पांच अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच चल रही है।

विज्ञापन

सुलह के लिए दबाव बनाता रहा मदन यादव
उसने बताया कि उससे दुष्कर्म का आरोपी मदन यादव अपने पद व प्रभाव के चलते उसके साथ ही उसके गवाह, परिवारीजनों फर्जी मुकदमा दर्ज कराकर अपने मुकदमे में सुलह के लिए दबाव बना रहा है। इसी के तहत उसने पहले फूलपुर में उसके भाई व गवाह पर दुष्कर्म का फर्जी केस दर्ज कराया।

इस मामले में एफआर लगने के बाद उसने हंडिया इंस्पेक्टर रहे बृजेश सिंह के साथ मिलकर उसके गवाह को हंडिया में दर्ज दुष्कर्म के मामले में फर्जी तरीके से जेल भेज दिया। यही नहीं आरोप यह भी है कि इसके अलावा भी उसके खिलाफ मदन यादव की तहरीर पर जार्जटाउन थाने में दो फर्जी मुकदमे लिखवा दिए। तहरीर में मांग की गई कि मदन यादव व इस साजिश में शामिल इंस्पेक्टर बृजेश सिंह, एसआई बलवंत यादव व अन्य लोगों पर विधिक कार्रवाई कर उसकी व उसके गवाह व परिवारीजनों की जान-माल की सुरक्षा की जाए।

कुल 14 धाराओं में लिखा गया केस
निलंबित इंस्पेक्टर-दरोगा व असिस्टेंट प्रोफेसर पर कुल 14 धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इनमें लोकसेवक का किसी व्यक्ति को क्षति पहुंचाने के आशय से कानून का उल्लंघन करना, लोकसेवक का क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध दस्तावेज रचना, लोकसेवक द्वारा किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति के समपहरण से बचाने के आशय से विधि के निर्देश की अवज्ञा करना, किसी व्यक्ति को दंड या किसी सपंत्ति की समपहरण से बचाने के आशय से लोकसेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना करना, किसी व्यक्ति को गलत तरीके से प्रतिबंधित करना समेत अन्य धाराएं शामिल हैं। जिनमें आपराधिक षडयंत्र और एससी-एसटी एक्ट भी शामिल है। 

असिस्टेंट प्रोफेसर व इंस्पेक्टर एक ही गांव के
पीड़िता की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया है कि उसके मुकदमे का आरोपी मदन यादव व निलंबित इंस्पेक्टर बृजेश सिंह दोनों गाजीपुर के करीमुद्दीनपुर गांव के रहने वाले हैं। इसी के तहत दोनों ने मिलकर यह साजिश रची, जिसमें अपने अन्य सहयोगियों को भी शामिल कर लिया। इसके साथ ही दबाव बनाने के लिए उसके गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजा और उस पर फर्जी केस भी दर्ज कराए।

कई अन्य पुलिसकर्मियों के भी आएंगे नाम
सूत्रों का कहना है कि भले ही मुकदमे में अभी दो ही पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया है। लेकिन विवेचना के दौरान अभी कई अन्य पुलिसकर्मियों के नाम भी सामने आएंगे। गौरतलब है कि इस मामले में कुल आठ पुलिसकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं। इनमें पूर्व सर्विलांस प्रभारी संजय सिंह यादव, इंस्पेक्टर शिशुपाल शर्मा, एसआई महेश चंद्र निषाद, हेड कांस्टेबल पन्नालाल यादव, अजय यादव व कांस्टेबल केके यादव भी शामिल हैं। विवेचना निष्पक्ष ढंग से हुई तो साजिशकर्ताओं के रूप में इन पुलिसकर्मियों का नाम आना लगभग तय है।

अफसर क्यों बंद किए रहे आंखें

  • इस प्रकरण में अफसरों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
  • बड़ा सवाल यह है कि विवेचना में खेल होता रहा तो पर्यवेक्षण अफसरों को इसकी जानकारी कैसे नहीं हो सकी।
  • फूलपुर में अगर विवेचना के दौरान मामला फर्जी पाया गया तो फिर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
  • हंडिया में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद 169 की रिपोर्ट भेजकर फर्जी तरीकेसे जेल भेजे गए गवाह को रिहा कराया गया, तो उसी समय इस फर्जीवाड़े का संज्ञान लेकर दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed