प्रयागराज : जिला पंचायत सदस्यों को अपने पाले में रखना दोनों ही दलों के लिए चुनौती
- दोनों ही दल अपने समर्थित जिला पंचायत सदस्यों की लगातार कर रहे निगहबानी
- क्रांस वोटिंग का सता रहा डर, कुछ पंचायत सदस्यों के जमा करा लिए गए फोन
विस्तार
जिला पंचायत अध्यक्ष पद का नामांकन होने के बाद अब प्रयागराज में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश के कई जिलों में भाजपा प्रत्याशियों की निर्विरोध जीत तय होने के बाद समाजवादी पार्टी ने अपने समर्थित जिला पंचायत सदस्यों की निगरानी तेज कर दी है। इस बीच भाजपा ने भी अपने वरिष्ठ नेताओं को जिला पंचायत सदस्यों की निगहबानी में लगा दिया है। दोनों ही दल के लिए जिला पंचायत सदस्यों को अपने पाले में तीन जुलाई तक रोक के रखना एक बड़ी चुनौती हो गई है।
दरअसल जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए भाजपा और सपा दोनों के ही पास अभी पर्याप्त समर्थन हीं है। हालांकि दोनों ही दल के नेता लगातार यही कह रहे हैं कि उनके पास पर्याप्त संख्या बल है। भाजपा की बात करें तो उसके पास 29 सदस्यों का समर्थन हासिल है, जबकि अध्यक्ष पद के लिए 43 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि उनके पास 60 सदस्यों का समर्थन हो गया है। इसी तरह सपाई भी 43 से ज्यादा सदस्यों के समर्थन की बात कर रहे हैं।
जिला पंचायत के पिछले कुछ चुनावों पर नजर डाले तो सत्ता पक्ष से जुड़े दल का ही प्रत्याशी अध्यक्ष पद की कुर्सी पर काबिज होता है। सपा के मीडिया प्रभारी दान बहादुर सिंह कहते हैं कि पार्टी को पूरा विश्वास है कि इस बार प्रयागराज में इतिहास बदलेगा और विपक्षी दल के प्रत्याशी के रूप में मालती यादव जिला पंचायत अध्यक्ष बनेंगी। वहीं दूसरी ओर कई वर्ष बाद यह पहला मौका है कि जब अध्यक्ष पद की लड़ाई में यमुनापार का कोई भी प्रत्याशी नहीं है। इस वजह से गंगापार के मुकाबले यमुनापार में ज्यादा आसानी से सदस्य टूट रहे हैं। दरअसल यमुनापार में जिला पंचायत की अधिकांश सीटों पर भाजपा के बागियों ने एवं पुराने सपाइयों ने ही चुनाव जीता है।