Kargil War : मध्य वायु कमान से हुई थी विमानों की कंट्रोलिंग, प्रयागराज का सीएसी की थी अहम भूमिका
वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध में प्रयागराज स्थित मध्य वायु कमान (सीएसी) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। तब सेना ने घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ लॉन्च किया था।
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वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध में प्रयागराज स्थित मध्य वायु कमान (सीएसी) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। तब सेना ने घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ लॉन्च किया था। युद्ध में मिराज 2000, मिग-21, मिग-17, जगुआर, मिग-23, मिग-27 और चेतक का इस्तेमाल हुआ। इसमें से अधिकांश विमानों की कंट्रोलिंग इसी कमान से की गई।
वर्ष 1971 के युद्ध के बाद वायुसेना ने पहली बार पहाड़ों में इतना बड़ा ऑपरेशन किया था। मिराज 2000, मिग 21, जगुआर, मिग 23 आदि लड़ाकू विमान प्रयागराज से ही उड़ान भरकर दुश्मन के यहां तबाही मचाकर लौट आते थे, हालांकि तब यह ऑपरेशन बेहद गुप्त रखा गया था। बताया जाता है कि जंग में बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों से आने वाले सैनिकों को सीएसी से वायुसेना के विमान से श्रीनगर और उधमपुर पहुंचाया जाता था। उस दौरान 800 से ज्यादा जवानों को प्रयागराज से कश्मीर पहुंचाया गया था।
माइनस 54 डिग्री में लिया दुश्मनों से मोर्चा
सेवानिवृत्त सूबेदार श्याम सुंदर सिंह पटेल बताते हैं कि माइनस 54 डिग्री में 18 हजार फीट ऊंची गिलगिट की पहाड़ी पर साथियों के साथ दुश्मन से मोर्चा ले रहा था। गिलगिट की ऊंची पहाड़ी से पाकिस्तानी सेना लगातार फायरिंग कर रही थी। हम सभी जवान रस्सी के सहारे ऊपर चढ़े। मौसम ने बहुत परेशान किया। तब ऊंची चोटी से पत्थर के छोटे टुकड़े भी गिरते थे तो गोली की तरह ही लगते थे। तब हमें अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। कमांडर के आदेश पर वायुसेना ने टाइगर हिल पर बमबारी शुरू कर दी। बमवर्षा इतनी हुई कि टाइगर हिल आग के गोले में तब्दील हो गया। इसके बाद कमांडर ने हमें आगे बढ़ने का आदेश दिया। चारों ओर से हम सभी ने टाइगर हिल को घेर लिया और बचे हुए पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। इसके बाद तिरंगा फहराया।