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स्मारक स्थल पर दर्ज होंगे शहीदों के नाम
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Kargil Shaheed
- फोटो : AU
प्रयागराज। ‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले/वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा’, के मकसद के साथ आजादी की लड़ाई में शहीद होने वालों की दास्ता एक जगह दर्ज होगी। जन सहभागिता के आधार पर सिविल इवैल्यूएशन फाउंडेशन की पहल पर सिविल लाइंस स्थित शहीदवाल पर ग्रेनाइट पत्थर से बनने वाले शहीद स्मारक पर प्रयागराज के ज्ञात-अज्ञात शहीदों के नाम टांके जाएंगे।
अंग्रेजों की गुलामी की बेड़ियां तोड़ने के लिए इलाहाबाद के आम नागरिकों ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1947 तक संघर्ष किया। 1857 के विद्रोह में हजारों लोग स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए। बाद में जब अंग्रेजों की सत्ता कायम हुई तो सैकड़ों लोगों को फांसी पर चढ़ा दिया गया। सिविल लाइंस रोडवेज के सामने स्थित शहीद वॉल पर शहीदों के नाम दर्ज होने से प्रयागराज या यहां आने वाला कोई भी व्यक्ति उनकी शहादत के बारे में जान सकेगा।
संयोजक वीरेंद्र पाठक के मुताबिक शहादत को सम्मान देने के लिए सबसे पहले चिन्हीकरण पूरा किया गया। इसके तहत डॉ.गायत्री सिंह की अध्यक्षता में गठित इतिहासकारों की शोध कमेटी ने पहले चरण में तकरीबन 250 शहीदों के नाम सूचीबद्ध किए हैं। इसमें प्रो.हेरंब चतुर्वेदी, डॉ.डीपी दुबे, क्षेत्रीय अभिलेख अधिकारी अमित कुमार अग्निहोत्री, गुलाम सरवर आदि सहयोगी रहे हैं।
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स्वतंत्रता दिवस के बाद होगी शुरुआत
फिलहाल शहीदों के नाम अंकन की जिम्मेदारी एक कमेटी को दी गई है। इसमें डॉ.प्रमोद शुक्ला, अजय शर्मा, अरविंद पांडेय, उत्तम बनर्जी, अभिनव उपाध्याय, पूनम मिश्रा आदि शामिल हैं। डॉ.प्रमोद शुक्ला के मुताबिक उम्मीद है कि यह काम पंद्रह अगस्त के बाद आरंभ होगा और गणतंत्र दिवस के पहले पूरा कर लिया जाएगा।
शहादत पट्टिका का लोकार्पण आज
शहीद ननका जी की शहादत की गौरवमयी गाथा को कोतवाली स्थित शहादत स्थल में शिलापट लगाकर दर्ज किया जाएगा। रविवार, 28 जुलाई को दोपहर बारह बजे लोकार्पण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीआईजी केपी सिंह होंगे।
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अंग्रेजों की गुलामी की बेड़ियां तोड़ने के लिए इलाहाबाद के आम नागरिकों ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1947 तक संघर्ष किया। 1857 के विद्रोह में हजारों लोग स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए। बाद में जब अंग्रेजों की सत्ता कायम हुई तो सैकड़ों लोगों को फांसी पर चढ़ा दिया गया। सिविल लाइंस रोडवेज के सामने स्थित शहीद वॉल पर शहीदों के नाम दर्ज होने से प्रयागराज या यहां आने वाला कोई भी व्यक्ति उनकी शहादत के बारे में जान सकेगा।
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संयोजक वीरेंद्र पाठक के मुताबिक शहादत को सम्मान देने के लिए सबसे पहले चिन्हीकरण पूरा किया गया। इसके तहत डॉ.गायत्री सिंह की अध्यक्षता में गठित इतिहासकारों की शोध कमेटी ने पहले चरण में तकरीबन 250 शहीदों के नाम सूचीबद्ध किए हैं। इसमें प्रो.हेरंब चतुर्वेदी, डॉ.डीपी दुबे, क्षेत्रीय अभिलेख अधिकारी अमित कुमार अग्निहोत्री, गुलाम सरवर आदि सहयोगी रहे हैं।
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स्वतंत्रता दिवस के बाद होगी शुरुआत
फिलहाल शहीदों के नाम अंकन की जिम्मेदारी एक कमेटी को दी गई है। इसमें डॉ.प्रमोद शुक्ला, अजय शर्मा, अरविंद पांडेय, उत्तम बनर्जी, अभिनव उपाध्याय, पूनम मिश्रा आदि शामिल हैं। डॉ.प्रमोद शुक्ला के मुताबिक उम्मीद है कि यह काम पंद्रह अगस्त के बाद आरंभ होगा और गणतंत्र दिवस के पहले पूरा कर लिया जाएगा।
शहादत पट्टिका का लोकार्पण आज
शहीद ननका जी की शहादत की गौरवमयी गाथा को कोतवाली स्थित शहादत स्थल में शिलापट लगाकर दर्ज किया जाएगा। रविवार, 28 जुलाई को दोपहर बारह बजे लोकार्पण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीआईजी केपी सिंह होंगे।