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Prayagraj : कहार जाति ने मांगा अनुसूचित जाति का आरक्षण, हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

Mon, 09 Sep 2024 03:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 09 Sep 2024 03:07 PM IST
सार

याचिका में कहा गया है कि कहार समुदाय को यूपी में केंद्र और राज्य सरकार दोनों की ही ओबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग की लिस्ट में रखा गया है। उन्हें यह दर्जा अंग्रेजों के राज में 1881 से ही दिया गया है। याची के अधिवक्ता राकेश कुमार गुप्ता की दलील है कि कहार कोई जाति नहीं है, बल्कि पेशेगत काम करने वालों का समूह है।

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Kahar caste demanded reservation for Scheduled Caste, approached the High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अन्य पिछड़ा वर्ग के सूची में शामिल कहार समुदाय के लोग अनुसूचित जाति की मान्यता चाहते हैं। अपनी मांग को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने गोरखपुर के धूरिया जनजाति सेवा संस्थान के अध्यक्ष राम अवध गोंड की ओर से दाखिल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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याचिका में कहा गया है कि कहार समुदाय को यूपी में केंद्र और राज्य सरकार दोनों की ही ओबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग की लिस्ट में रखा गया है। उन्हें यह दर्जा अंग्रेजों के राज में 1881 से ही दिया गया है। याची के अधिवक्ता राकेश कुमार गुप्ता की दलील है कि कहार कोई जाति नहीं है, बल्कि पेशेगत काम करने वालों का समूह है। कहार समुदाय के लोग डोली उठने, पानी भरने, सिंघाड़े की खेती करने और मछली पालन का काम करते हैं।

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ओबीसी सूची में चौथे नंबर की जाति है कहार

याची का दावा है कि कहार के पेशे से जुड़े परंपरागत काम करने वाले लोगों में ज्यादातर 11 जनजातीय यानी ट्राइब्स के लोग होते हैं। इनमें मुख्य रूप से भोई, धीमर, धुरिया, गुरिया, गोंड, कलेनी, कमलेथर, हुर्का, मछेरा, महारा, पनभरा और सिंघाड़िया शामिल हैं। इन जातियों को कहीं एससी की कैटेगरी में रखा गया है तो कहीं एसटी की कैटेगरी में उत्तर प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार दोनों की ही ओबीसी लिस्ट में कहार समुदाय को चौथे नंबर पर रखा गया है। इस वजह से रेवेन्यू डिपार्टमेंट के लोग इन्हें ओबीसी कैटेगरी का ही कास्ट सर्टिफिकेट देते हैं। जबकि, इन्हें एससी या एसटी का जाति प्रमाण पत्र मिलना चाहिए। अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को होगी।

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