फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Justice against video conferencing against judicial process: AN Tripathi

वीडियो कांफ्रेंसिंग से न्याय न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफः एएन त्रिपाठी

Mon, 13 Apr 2020 09:12 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 13 Apr 2020 09:12 PM IST
विज्ञापन
Justice against video conferencing against judicial process: AN Tripathi
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
कांस्टीट्यूशन एंड सोशल रिफॉर्म के राष्ट्रीय अध्यक्ष, संविधानविद वरिष्ठ अधिवक्ता ए एन त्रिपाठी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालती मुकदमों की सुनवाई को व्यापक न्याय हित एवं न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत बताया है और कहा है कि अनुच्छेद 142 के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट किसी विचाराधीन मुकदमे में सुनवाई करते हुए व्यापक न्यायहित में सामान्य निर्देश जारी कर सकता है। स्वत: संज्ञान लेकर न्यायिक प्रक्रिया में बदलाव के आदेश जारी करना संविधान के मूलभूत ढांचे एवं न्यायिक प्रक्रिया के नियमों के विपरीत है। इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। 
विज्ञापन


त्रिपाठी ने कहा अदालतें नियमों व प्रक्रिया के आधार पर चलती हैं। नियम और प्रक्रिया तय करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट को प्राप्त है। बिना नियम परिवर्तित किए वीडियो कान्फ्रेंसिंग से मुकदमों की सुनवाई करना सांविधानिक न्यायिक परिकल्पना के अनुरूप नहीं कहा जा सकता। त्रिपाठी ने कहा कि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले राज्य की अदालतों  द्वारा वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की व्यवस्था करना व्यापक न्याय हित में नहीं है।
विज्ञापन


वादकारी को अदालत में आकर मुकदमे की सुनवाई का अवसर न देना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के अनुकूल नहीं है। इस व्यवस्था से आम अधिवक्ता न्याय  प्रक्रिया में शामिल होने से वंचित रह जाएगा और कुछ खास तबके के अधिवक्ता ही इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे। इसके अलावा आम वादकारियों को भी इसका लाभ नहीं मिल सकेगा। त्रिपाठी ने केशवानंद भारती और मफतलाल केस में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के  फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अदालतों को नियम में बदलाव करने के पश्चात ऐसे निर्णय लागू करना चाहिए, जो जनहित एवं व्यापक न्यायहित में हों। उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की सीमित प्रक्रिया अपनाने पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed