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अभी डोलेगी धरती, लेकिन आप हैं सुरक्षित
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 14 Apr 2016 01:09 AM IST
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अर्थ ऑवर
- फोटो : कुमार संजय/अमर उजाला, नई दिल्ली
तकरीबन एक साल के अंतराल पर भूकंप ने एक बार फिर तगड़ा झटका दिया है। दहशत में लोग एक बार फिर घरों से बाहर निकलकर मैदान में आ गए, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। गंगा और यमुना नदियां इलाहाबाद को भूकंप से खास सुरक्षा प्रदान करती हैं। इतना ही नहीं भूकंप के लिहाज से अतिसंवेदनशील स्थानों से भी इलाहाबाद काफी दूर है। इसलिए भविष्य में भी इलाहाबाद और कानपुर के लोगों को भूकंप से डरने की जरूरत नहीं है।
भूकंप पर लंबे समय से शोध कर रहे मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रोफेसर एसके दुग्गल का कहना है कि दो दिन पहले तथा बुधवार को म्यांमार में आए भूकंप अलग-अलग हैं। इनके ऑफ्टर शॉक अभी और आएंगे, लेकिन इलाहाबाद में इसका कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद और कानपुर आसपास के जिलों से भी अधिक सुरक्षित हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के प्रोफेसर एचएन मिश्रा ने बताया कि भूकंप के संवेदनशीलता के लिहाज से पूरे देश को चार हिस्साें में बांटा गया है। इलाहाबाद सबसे सुरक्षित जोन में है।
उन्होंने बताया कि देश में 38 शहर को अतिसंवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है। इलाहाबाद अतिसंवेदनशील हिमालय तथा इन शहरों से भी दूर है। इस लिहाज से भी यह सुरक्षित है। भूकंप पर ही वर्षों से शोध कर रहे विश्वविद्यालय के अर्थ एंड प्लेनटरी साइंस विभाग के प्रोफेसर जयंत नाथ त्रिपाठी ने बताया कि यह सात रिक्टर पैमाने का भूकंप था, जो काफी तेज होता है, लेकिन इसका केंद्र धरती की सतह से काफी नीचे रहा। इसलिए नुकसान कम होगा। उन्होंने बताया कि म्यांमार इसका केंद्र है। भौगोलिक दृष्टि से काफी क्रिटिकल पोजिशन पर है। भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील भी है। उन्हाेंने बताया कि इसके ऑफ्टर शॉक लगातार महसूस किए जाएंगे, लेकिन इसका इलाहाबाद में कोई असर नहीं होगा।
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भूकंप पर लंबे समय से शोध कर रहे मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रोफेसर एसके दुग्गल का कहना है कि दो दिन पहले तथा बुधवार को म्यांमार में आए भूकंप अलग-अलग हैं। इनके ऑफ्टर शॉक अभी और आएंगे, लेकिन इलाहाबाद में इसका कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद और कानपुर आसपास के जिलों से भी अधिक सुरक्षित हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के प्रोफेसर एचएन मिश्रा ने बताया कि भूकंप के संवेदनशीलता के लिहाज से पूरे देश को चार हिस्साें में बांटा गया है। इलाहाबाद सबसे सुरक्षित जोन में है।
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उन्होंने बताया कि देश में 38 शहर को अतिसंवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है। इलाहाबाद अतिसंवेदनशील हिमालय तथा इन शहरों से भी दूर है। इस लिहाज से भी यह सुरक्षित है। भूकंप पर ही वर्षों से शोध कर रहे विश्वविद्यालय के अर्थ एंड प्लेनटरी साइंस विभाग के प्रोफेसर जयंत नाथ त्रिपाठी ने बताया कि यह सात रिक्टर पैमाने का भूकंप था, जो काफी तेज होता है, लेकिन इसका केंद्र धरती की सतह से काफी नीचे रहा। इसलिए नुकसान कम होगा। उन्होंने बताया कि म्यांमार इसका केंद्र है। भौगोलिक दृष्टि से काफी क्रिटिकल पोजिशन पर है। भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील भी है। उन्हाेंने बताया कि इसके ऑफ्टर शॉक लगातार महसूस किए जाएंगे, लेकिन इसका इलाहाबाद में कोई असर नहीं होगा।
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