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सिर्फ शादी के लिए धर्म परिवर्तन अवैध: हाईकोर्ट

ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Sat, 20 Dec 2014 12:19 AM IST
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Just convert to marriage illegal : HC
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हाईकोर्ट ने किसी खास मकसद या प्रलोभन में किए गए धर्मपरिवर्तन को अवैध करार दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई सिर्फ शादी  करने की नीयत से धर्म बदल रहा है और उसमें उसकी आस्था नहीं है तो ऐसा धर्म परिवर्तन सही नहीं माना जा सकता है। इस्लाम धर्म को अपनाने के लिए पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब और कुरान शरीफ में आस्था सहित इस्लाम की जानकारी जरूरी है।  धर्म परिवर्तन के लिए जरूरी है कि हृदय परिवर्तन के साथ व्यक्ति की धार्मिक आस्था में भी बदलाव हुआ हो। इस निरीक्षण के साथ कोर्ट ने पांच हिंदू लड़कियों की ओर से मुस्लिम लड़कों से शादी के लिए दाखिल याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
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नूरजहां बेगम उर्फ अंजली मिश्रा और अन्य द्वारा दाखिल याचिकाओं पर न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। लड़कियां सिद्धार्थनगर, देवरिया, कानपुर और प्रतापगढ़ जिलों की हैं। उन्होंने अपनी मर्जी से धर्मपरिवर्तन कर मुस्लिम युवकों से शादी करने तथा अपने वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप रोकने की मांग को लेकर याचिकाएं दाखिल की थीं। कोर्ट में मौजूद जोड़ों में से जब लड़कियों से इस्लाम के बारे में पूछा गया तो उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने कहा, कोई भी स्वस्थ्यचित्त वयस्क व्यक्ति सच्ची आस्था के साथ इस्लाम कुबूल कर सकता है जबकि इन लड़कियों ने सिर्फ शादी के लिए इस्लाम कुबूल किया। इसमे इनकी आस्था तो दूर, इन्हें उसकी जानकारी भी नहीं है। धार्मिक आस्था में बदलाव के बिना, धर्म परिवर्तन वैध नहीं माना जा सकता है। धर्म परिवर्तन सदाशयता पूर्ण होना चाहिए। चालाकी या किसी विशेष इरादे से बगैर भावना परिवर्तन धर्मांतरण शून्य है।


 मुस्लिम लड़कों से धर्मपरिवर्तन के बाद निकाह करके संरक्षण के लिए हाईकोर्ट आई लड़कियों के निकाहनामे और धर्मांतरण पर सरकार के वकील ने आपत्ति उठाई। नूरजहां की याचिका पर याची लड़की ने कोर्ट में दिए सशपथ बयान में कहा कि उसका धर्मांतरण लड़के ने शादी करने के इरादे से कराया है। धर्मांतरण इलाहाबाद के अकबरपुर मोहल्ले में कराया गया। इसके अलावा वह और कुछ नहीं जानती। वह इस्लाम के बारे में भी कुछ नहीं जानती। बयानों में भारी विरोधाभास दिखा। लड़की ने अपना नाम किरन बताया और इसी नाम से दस्तख्त भी किया। उसने बताया कि वह 20 अक्तूबर को शाम पांच बजे अकेले इलाहाबाद पहुंची और निकाह सुबह नौ बजे हुई जबकि लड़के ने अपने बयान में कहा कि वह 20 अक्तूबर को सुबह सात बजे लड़की के साथ यहां पहुंचा तथा धर्मांतरण और निकाह उसी दिन सुबह नौ बजे हुआ। कोर्ट ने पाया कि शादी संबंधी दस्तावेज संदिग्ध हैं। अन्य याचिकाओं में भी याचियों के बयान में ऐसे विरोधाभास पाए गए।

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