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आंधी संग झमाझम बारिश, किसानों पर आफत
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 09 Apr 2018 01:56 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
मौसम का मिजाज शनिवार रात अचानक बदल गया। धूल भरी आंधी और करीब पांच घंटे हुई झमाझम बारिश से किसानों पर आफत आई गई है। आंधी और ओले पड़ने से आम के टिकोरे जमीन पर आ गिरे। गेहूं और सरसों की फसल को नुकसान पहुंचा है। कटाई-मड़ाई का काम बाधित हुआ। खलिहानों में रखे गेहूं-सरसों के बोझ और भूसा उड़ा और भीगा भी। जलजमाव से नीचे के बोझ डूब गए। 28.8 मिमी. दर्ज की गई बारिश से कई खेतों में मेड़ तक पानी भर गया। आंधी से अधिकांश गांवों की बिजली गुल हो गई। सुबह किसान फसलों का हाल देख परेशान हो गए। अनुमान के मुताबिक कुल फसली क्षेत्र का दस फीसदी नुकसान हुआ है।
गंगा के मैदानी इलाकों में सक्रिय विक्षोभ मौसमी चक्रवात का कारण बना। पश्चिम बंगाल से आया विक्षोभ ने संक्रमण बढ़ाया। दिन में गर्मी और रात का तापमान बढ़ने के बाद भी पहाड़ी हवाओं संग आए आवारा बादलों ने मौसम का मिजाज बदल दिया। शनिवार रात अचानक आया गरज चमक संग आया अंधड़ किसानों के लिए परेशानी भरा रहा। खेतों के खलिहानों में फसल बचाने पहुंचे किसान झमाझम बारिश से मायूस हो गए। रात पौने एक बजे से शुरू हुई बारिश पांच घंटे तक फसलों पर कहर बरपाती रही। रविवार को दिनभर किसान बारिश में भीगे फसलों के बोझ को हटाते फैलाते रहे। हलांकि दिन में खिली धूप राहत भरी रही लेकिन खेतों में खड़ी भीगी फसलें और खलिहान में पड़े बोझ गीले होने से मड़ाई में सात से दस दिन का विलंब होगा। थ्रेसर शांत रहेंगे।
जिले के यमुनापार और गंगापार में नैनी, बारा, करछना, कोरांव, मेजा भीरपुर, मंसूराबाद, नवनाबगंज, लालगोपालगंज, हंडिया सोरांव, झूंसी, कौड़िहार, होलागढ़, फूलपुर, सैदाबाद, बरौत, भीटी, जगतपुर, हनुमानगंज, तिलई बाजार में आदि इलाकों में आंधी-पानी और ओले से गेहूं-सरसों आदि की फसल को नुकसान हुआ है। कृषि विशेषज्ञों और मौसम विज्ञानियों के मुताबिक इस आंधी-बारिश में फसलों के साथ आम की फसल करीब दस फीसदी प्रभावित हुई है।
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जिला कृषि अधिकारी अश्विनी कुमार सिंह के मुताबिक आंधी और बारिश से खलिहानों में पड़ी फसल प्रभावित होगी। समय रहते बोझ सुखा लिए गए तो नुकसान से बचाव हो सकता है। इस स्थिति में जल्दी थ्रेसरिंग कराने से गेहूं के दानों में कालापन आ सकता है। उन्होंने बताया कि गेहूं की पैदावार तीन से पांच फीसदी, सरसों के साथ अन्य फसलें पांच से सात फीसदी और आम की फसल सिर्फ दो से तीन फीसदी प्रभावित होगी।
शनिवार रात आई आंधी से शहर के साथ ग्रामीण इलाकों में बिजली व्यवस्था पटरी से उतर गई। जगह-जगह पोल गिरने व तार टूटने से जिले के 700 से अधिक गांवों की बत्ती गुल हो गई। बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए विद्युत विभाग के कर्मचारी रविवार को दिन में निकले तो लेकिन संसाधनों की कमी से विद्युत आपूर्ति का प्रतिशत न के बराबर रहा।
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गंगा के मैदानी इलाकों में सक्रिय विक्षोभ मौसमी चक्रवात का कारण बना। पश्चिम बंगाल से आया विक्षोभ ने संक्रमण बढ़ाया। दिन में गर्मी और रात का तापमान बढ़ने के बाद भी पहाड़ी हवाओं संग आए आवारा बादलों ने मौसम का मिजाज बदल दिया। शनिवार रात अचानक आया गरज चमक संग आया अंधड़ किसानों के लिए परेशानी भरा रहा। खेतों के खलिहानों में फसल बचाने पहुंचे किसान झमाझम बारिश से मायूस हो गए। रात पौने एक बजे से शुरू हुई बारिश पांच घंटे तक फसलों पर कहर बरपाती रही। रविवार को दिनभर किसान बारिश में भीगे फसलों के बोझ को हटाते फैलाते रहे। हलांकि दिन में खिली धूप राहत भरी रही लेकिन खेतों में खड़ी भीगी फसलें और खलिहान में पड़े बोझ गीले होने से मड़ाई में सात से दस दिन का विलंब होगा। थ्रेसर शांत रहेंगे।
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जिले के यमुनापार और गंगापार में नैनी, बारा, करछना, कोरांव, मेजा भीरपुर, मंसूराबाद, नवनाबगंज, लालगोपालगंज, हंडिया सोरांव, झूंसी, कौड़िहार, होलागढ़, फूलपुर, सैदाबाद, बरौत, भीटी, जगतपुर, हनुमानगंज, तिलई बाजार में आदि इलाकों में आंधी-पानी और ओले से गेहूं-सरसों आदि की फसल को नुकसान हुआ है। कृषि विशेषज्ञों और मौसम विज्ञानियों के मुताबिक इस आंधी-बारिश में फसलों के साथ आम की फसल करीब दस फीसदी प्रभावित हुई है।
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जिला कृषि अधिकारी अश्विनी कुमार सिंह के मुताबिक आंधी और बारिश से खलिहानों में पड़ी फसल प्रभावित होगी। समय रहते बोझ सुखा लिए गए तो नुकसान से बचाव हो सकता है। इस स्थिति में जल्दी थ्रेसरिंग कराने से गेहूं के दानों में कालापन आ सकता है। उन्होंने बताया कि गेहूं की पैदावार तीन से पांच फीसदी, सरसों के साथ अन्य फसलें पांच से सात फीसदी और आम की फसल सिर्फ दो से तीन फीसदी प्रभावित होगी।
शनिवार रात आई आंधी से शहर के साथ ग्रामीण इलाकों में बिजली व्यवस्था पटरी से उतर गई। जगह-जगह पोल गिरने व तार टूटने से जिले के 700 से अधिक गांवों की बत्ती गुल हो गई। बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए विद्युत विभाग के कर्मचारी रविवार को दिन में निकले तो लेकिन संसाधनों की कमी से विद्युत आपूर्ति का प्रतिशत न के बराबर रहा।