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High Court: विधिक माप विज्ञान अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध में आईपीसी के प्रावधान लागू नहीं, कोर्ट ने रद्द किया
Wed, 29 Oct 2025 03:35 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 29 Oct 2025 03:35 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विधिक माप विज्ञान अधिनियम-2009 के अंतर्गत दंडनीय अपराधों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विधिक माप विज्ञान अधिनियम-2009 के अंतर्गत दंडनीय अपराधों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति विक्रम डी.चौहान की एकल पीठ ने बांदा निवासी पेट्रोल पंप संचालक के खिलाफ घटतौली के मामले में दर्ज मुकदमे की आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। हालांकि, धोखाधड़ी और आवश्यक वस्तु अधिनियम से संबंधित धाराओं पर मुकदमा जारी रहेगा।
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बांदा के बड़ौसा थाना क्षेत्र के पांडेय फिलिंग स्टेशन पर निरीक्षण के दौरान पेट्रोल पंप के एक नोजल में खराबी पाई गई। आरोप था कि इसके चलते ग्राहकों को कम ईंधन दिया जा रहा था। इस आधार पर 2017 में याची के खिलाफ आईपीसी की धारा 265, 266, 419, 420 और आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा-3/7 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। ट्रायल कोर्ट ने समन आदेश जारी किया तो याची ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए मुकदमे की पूरी कार्यवाही को रद्द करने की मांग की।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोप झूठे हैं। निरीक्षण के दौरान मिलीं कमियां यांत्रिक थीं। माप-तौल में गड़बड़ी पर आईपीसी के तहत केस नहीं दर्ज किया जा सकता। वहीं, अपर शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि निरीक्षण के दौरान पेट्रोल पंप की सील खराब पाई गई है।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि विधिक माप विज्ञान अधिनियम की धारा-51 के तहत जब कोई अपराध इस अधिनियम के तहत दंडनीय है तो आईपीसी की माप या वजन से जुड़ी धाराएं लागू नहीं होंगी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आईपीसी की धारा 419, 420 और आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा में दर्ज मुकदमे में कार्यवाही जारी रहेगी। क्योंकि, ये धाराएं धोखाधड़ी और सार्वजनिक हित से जुड़ी हैं। इन पर विधिक माप विज्ञान अधिनियम की रोक लागू नहीं होती।