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ऋचा के मामले में बैकफुट पर इविवि प्रशासन
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प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की शोध छात्रा और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह के मामले में इविवि प्रशासन बैकफुट पर है। ऋचा के खिलाफ शोध अवधि विस्तार के निलंबन की अनुशंसा वापस ले ली गई है। इस बाबत चीफ प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक और डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार ने ऋचा को पत्र जारी करते हुए सूचना दी है।
एचओआर हॉस्टल न छोड़ने पर ऋचा को पांच दिसंबर को नोटिस जारी किया गया था और ऋचा के शोध अवधि विस्तार के निलंबन की अनुशंसा कुलपति को भेजी गई थी। नोटिस में कहा गया था कि आठ दिसंबर तक हॉस्टल छोड़ दें। ऋचा ने सात दिसंबर को हॉस्टल छोड़ दिया और अधीक्षक कार्यालय को भी लिखित रूप से सूचना दी। इसके बाद 10 दिसंबर को एक और नोटिस जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि ऋचा पर 23800 रुपये बकाया है। वह बकाया जमा करें। साथ ही हॉस्टल से अदेयता प्रमाणपत्र प्राप्त करें और स्पष्टीकरण दें ताकि शोध अवधि में विस्तार संबंधी आवेदन पर विचार के लिए अनुशंसा कुलपति को भेजी जा सके।
बृहस्पतिवार को इविवि प्रशासन की ओर से शोध अवधि विस्तार के निलंबन की अनुशंसा वापस ले गई। ऋचा को जारी पत्र में कहा गया है कि यह निर्णय इविवि प्रशासन ने छात्रहित को देखते हुए लिया है। गौरतलब है कि ऋचा की शोध अवधि के पांच साल अगस्त में पूरे हो चुके हैं और उन्होंने शोध अवधि में छह माह के विस्तार के लिए आवेदन कर रखा है। इस मामले में ऋचा का कहना है कि राष्ट्रीय महिला आयोग की चेतावनी के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लिया गया यह निर्णय इस बात का प्रमाण है कि विश्वविद्यालय अपने अनैतिक कार्यों को छिपाने के लिए छात्रों का अकादमिक कॅरियर को खतरे में डाल देता है।
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एचओआर हॉस्टल न छोड़ने पर ऋचा को पांच दिसंबर को नोटिस जारी किया गया था और ऋचा के शोध अवधि विस्तार के निलंबन की अनुशंसा कुलपति को भेजी गई थी। नोटिस में कहा गया था कि आठ दिसंबर तक हॉस्टल छोड़ दें। ऋचा ने सात दिसंबर को हॉस्टल छोड़ दिया और अधीक्षक कार्यालय को भी लिखित रूप से सूचना दी। इसके बाद 10 दिसंबर को एक और नोटिस जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि ऋचा पर 23800 रुपये बकाया है। वह बकाया जमा करें। साथ ही हॉस्टल से अदेयता प्रमाणपत्र प्राप्त करें और स्पष्टीकरण दें ताकि शोध अवधि में विस्तार संबंधी आवेदन पर विचार के लिए अनुशंसा कुलपति को भेजी जा सके।
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बृहस्पतिवार को इविवि प्रशासन की ओर से शोध अवधि विस्तार के निलंबन की अनुशंसा वापस ले गई। ऋचा को जारी पत्र में कहा गया है कि यह निर्णय इविवि प्रशासन ने छात्रहित को देखते हुए लिया है। गौरतलब है कि ऋचा की शोध अवधि के पांच साल अगस्त में पूरे हो चुके हैं और उन्होंने शोध अवधि में छह माह के विस्तार के लिए आवेदन कर रखा है। इस मामले में ऋचा का कहना है कि राष्ट्रीय महिला आयोग की चेतावनी के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लिया गया यह निर्णय इस बात का प्रमाण है कि विश्वविद्यालय अपने अनैतिक कार्यों को छिपाने के लिए छात्रों का अकादमिक कॅरियर को खतरे में डाल देता है।
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