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वाराणसी शहर को बंदरों से निजात दिलाने का निर्देश
Wed, 15 Sep 2021 08:15 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 15 Sep 2021 08:15 PM IST
सार
कोर्ट ने कहा कि बंदरों को कानूनी प्रक्रिया के तहत शिफ्ट किया जाए। शिफ्टिंग में यह ख्याल रखा जाए बंदरों को कोई नुकसान न पहुंचे और ऐसे जंगल में भेजा जाए जहां उनके जीवन के लिए जरूरी वनस्पतियां मौजूद हों।
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बंदर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी शहर से उत्पात मचाने वाले बंदरों को उपयुक्त जंगल में दो माह के भीतर शिफ्ट करने का निर्देश दिया है। याची का कहना था कि बंदरों से खास इलाके के निवासियों व टूरिस्ट को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
कोर्ट ने कहा कि बंदरों को कानूनी प्रक्रिया के तहत शिफ्ट किया जाए। शिफ्टिंग में यह ख्याल रखा जाए बंदरों को कोई नुकसान न पहुंचे और ऐसे जंगल में भेजा जाए जहां उनके जीवन के लिए जरूरी वनस्पतियां मौजूद हों। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी तथा न्यायमूर्ति एके ओझा की खंडपीठ ने मां गंगा पक्का महल ट्रस्ट की तरफ से दाखिल जनहित याचिका पर दिया है।
याची का कहना था कि बंदरों से वाराणसी शहर के लोग परेशान हैं। उन्हें जंगल में शिफ्ट किया जाए। सरकारी वकील ने कहा कि जिला वन अधिकारी ने मुख्य वन संरक्षक से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलते ही बंदरों को शिफ्ट किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने स्वयं एक्शन लिया है। कार्यवाही तीन माह में पूरी की जाए।
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कोर्ट ने कहा कि बंदरों को कानूनी प्रक्रिया के तहत शिफ्ट किया जाए। शिफ्टिंग में यह ख्याल रखा जाए बंदरों को कोई नुकसान न पहुंचे और ऐसे जंगल में भेजा जाए जहां उनके जीवन के लिए जरूरी वनस्पतियां मौजूद हों। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी तथा न्यायमूर्ति एके ओझा की खंडपीठ ने मां गंगा पक्का महल ट्रस्ट की तरफ से दाखिल जनहित याचिका पर दिया है।
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याची का कहना था कि बंदरों से वाराणसी शहर के लोग परेशान हैं। उन्हें जंगल में शिफ्ट किया जाए। सरकारी वकील ने कहा कि जिला वन अधिकारी ने मुख्य वन संरक्षक से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलते ही बंदरों को शिफ्ट किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने स्वयं एक्शन लिया है। कार्यवाही तीन माह में पूरी की जाए।
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