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इंदिरा मैराथन : चार बार गिरीं, हुईं बेहोश, नहीं मानी हार, दिल्ली की नूतन ने दूसरा स्थान किया हासिल

Sun, 19 Nov 2023 01:18 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 19 Nov 2023 01:18 PM IST
सार

आठ भाई बहनों में छठवें स्थान पर नूतन की पारिवारिक स्थिति काफी नाजुक है। वह पढ़ाई के साथ ही दौड़ में भी पूरी रुचि लेती हैं और रोजाना सुबह शाम 10 किलोमीटर दौड़ती हैं। इंदिरा मैराथन में उन्होंने दूसरी बार हिस्सा लिया है।

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Indira Marathon Fell several times became unconscious, did not accept defeat, Delhi's Nutan achieved second
इंदिरा मैराथन में दूसरा स्थान हासिल करने वाली नूतन। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अखिल भारतीय प्राइजमनी इंदिरा मैराथन में दूसरा स्थान हासिल करने वाली दिल्ली के शहादरा की रहने वाली नूतन दौड़ते समय कई बार गिरीं और बेहोश हो गईं। बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। वह उठीं और फिर दौड़ी। इस दौरान वह कई बार गश खाकर रास्ते में गिरीं, लेकिन उनका जज्बा कम नहीं हुआ। अंतत: उन्होंने महिला वर्ग में दूसरा स्थान हासिल किया। नूतन के साथ उनके भाई ने भी इंदिरा मैराथन में हिस्सा लिया। नूतन बताती हैं कि अगर वह कई बार गिरी न होतीं तो वह पहला स्थान प्राप्त कर सकती थीं, लेकिन इसके लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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जनवरी में मुंबई में होने वाली प्रतियोगिता में वह पूरे जोश के साथ हिस्सा लेंगी। आठ भाई बहनों में छठवें स्थान पर नूतन की पारिवारिक स्थिति काफी नाजुक है। वह पढ़ाई के साथ ही दौड़ में भी पूरी रुचि लेती हैं और रोजाना सुबह शाम 10 किलोमीटर दौड़ती हैं। इंदिरा मैराथन में उन्होंने दूसरी बार हिस्सा लिया है। इस बार उहोंने दूसरा स्थान हासिल किया है। नूतन की मां शीला फैक्ट्री में काम करती हैं। सारे भाई बहन पढ़ते हैं। पिता का देहांत हो चुका है।

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घर में जो बनता है वही खाते हैं, अलग से कुछ नहीं

नूतन बताती हैं परिवार में उनके लिए कोई अलग से डाइट नहीं है। घर में जो सब खाना खाते हैं वही वह भी खाती हैं। नानवेज वह नहीं खाती हैं। प्रोटीन आदि के लिए पनीर आदि जो घर में बनता है वही खाती हैं। उनका कोई अलग से डाइट प्लान नहीं है। जो लेती हैं वह घर पर ही लेती हैं, बाहर का कुछ भी नहीं खाती हैं। 

सुबह पांच बजे उठ जाती हैं

नूतन बताती हैं वह नियमित रूप से सुबह पांच बजे सोकर उठ जाती हैं। करीब 10 किलोमीटर की दौड़ रोज लगाती हैं। 

जीत के पैसे से खरीदना है घर

नूतन बताती हैं कि यहां से जो पैसे मिलेंगे उससे वह अपनी मम्मी की मदद करेंगी, ताकि हम अपना मकान खरीद सकें। परिवार की आमदनी का कोई जरिया नहीं है। परिवार अभी किराए के मकान में रहता है। 

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