{"_id":"5839ddfe4f1c1bd14d13b3cf","slug":"incom-tax-allahabad","type":"story","status":"publish","title_hn":"पच्चीस हजार से ज्यादा जमा किया टैक्स तो अब बताएं स्रोत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पच्चीस हजार से ज्यादा जमा किया टैक्स तो अब बताएं स्रोत
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Sun, 27 Nov 2016 01:05 AM IST
विज्ञापन
other
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिन लोगों ने 11 नवंबर के बाद से अब गृहकर और जलकर मद में एकमुश्त रकम जमा कर दी है, आने वाले दिन उनके लिए मुसीबत भरे साबित हो सके हैं। आयकर विभाग के निर्देश पर नगर निगम एवं जलकल विभाग ऐसे भवन स्वामियों की सूची तैयार कर रहा है, जिन्होंने इस अवधि में 25-50 हजार रुपये या इससे अधिक रकम टैक्स के रूप में जमा की और नोट पांच सौ और हजार की है। निगम प्रशासन सूची तैयार कर आयकर विभाग को देगा, इसके बाद भवन स्वामियों को आय का हिसाब देना होगा।
नए सम्पत्ति कर अधिनियम में व्यावसायिक भवनों के टैक्स में पांच-छह गुना से लेकर दस गुना तक का इजाफा हुआ है। पिछले वर्ष मार्च-अप्रैल में इसे लागू करने के बाद से ही विरोध हो रहा था। बाद में अधिनियम में संशोधन के लिए मामला शासन में गया, जहां यह अभी तक लंबित है। इस बीच आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोट बंदी का फरमान जारी किया और उसके बाद 11 नवंबर से पुराने नोट से टैक्स जमा करने का निर्देश दिया गया, उसके बाद से नगर निगम और जलकल विभाग के काउंटरों पर बिल जमा करने वालों की भीड़ जुटने लगी। व्यावसायिक भवनों के मालिक विरोध भूलकर टैक्स जमा करने के लिए कतार में खड़े नजर आए।
मामला व्यावसायिक भवनों का था, सो जाहिर है कि टैक्स जमा करने वाले ज्यादातर व्यापारी ही होंगे। निगम सूत्रों की मानें तो इस अवधि में मुट्ठीगंज, चौक, मीरापुर, कीडगंज, कटरा, सिविल लाइंस आदि के कई व्यावसायिक भवनों के मालिकों ने 80 हजार से 1.50 लाख रुपये तक गृहकर तथा जलकर जमा किया। इसमें ऐसे लोग भी शामिल थे, जिनका लंबे समय से गृहकर-जलकर बकाया था। सभी भवन मालिक पांच सौ और हजार के नोट ही लेकर बिल जमा करने पहुंचे। इस बीच आयकर विभाग ने 25 हजार रुपये से अधिक एकमुश्त जमा करने वालों की सूची निगम प्रशासन से मांगी है। सूत्रों के मुताबिक निगम और जलकल प्रशासन ऐसे भवन स्वामियों की सूची तैयार कर रहा है, जिसे अगले कुछ दिनों में आयकर विभाग को सौंप दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
नए सम्पत्ति कर अधिनियम में व्यावसायिक भवनों के टैक्स में पांच-छह गुना से लेकर दस गुना तक का इजाफा हुआ है। पिछले वर्ष मार्च-अप्रैल में इसे लागू करने के बाद से ही विरोध हो रहा था। बाद में अधिनियम में संशोधन के लिए मामला शासन में गया, जहां यह अभी तक लंबित है। इस बीच आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोट बंदी का फरमान जारी किया और उसके बाद 11 नवंबर से पुराने नोट से टैक्स जमा करने का निर्देश दिया गया, उसके बाद से नगर निगम और जलकल विभाग के काउंटरों पर बिल जमा करने वालों की भीड़ जुटने लगी। व्यावसायिक भवनों के मालिक विरोध भूलकर टैक्स जमा करने के लिए कतार में खड़े नजर आए।
विज्ञापन
मामला व्यावसायिक भवनों का था, सो जाहिर है कि टैक्स जमा करने वाले ज्यादातर व्यापारी ही होंगे। निगम सूत्रों की मानें तो इस अवधि में मुट्ठीगंज, चौक, मीरापुर, कीडगंज, कटरा, सिविल लाइंस आदि के कई व्यावसायिक भवनों के मालिकों ने 80 हजार से 1.50 लाख रुपये तक गृहकर तथा जलकर जमा किया। इसमें ऐसे लोग भी शामिल थे, जिनका लंबे समय से गृहकर-जलकर बकाया था। सभी भवन मालिक पांच सौ और हजार के नोट ही लेकर बिल जमा करने पहुंचे। इस बीच आयकर विभाग ने 25 हजार रुपये से अधिक एकमुश्त जमा करने वालों की सूची निगम प्रशासन से मांगी है। सूत्रों के मुताबिक निगम और जलकल प्रशासन ऐसे भवन स्वामियों की सूची तैयार कर रहा है, जिसे अगले कुछ दिनों में आयकर विभाग को सौंप दिया जाएगा।
विज्ञापन