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दानिश समेत संगम नगरी की सात प्रतिभाओं का होगा सम्मान
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 29 Aug 2016 02:16 AM IST
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इलाहाबाद। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सोमवार को अपने आवास पर दानिश (कैश अवॉर्ड) समेत संगम नगरी की सात प्रतिभाओं को लक्ष्मण एवं रानी लक्ष्मीबाई अवॉर्ड से सम्मानित करेंगे। इसको लेकर खिलाड़ियों में उत्साह एवं खुशी है। खिलाड़ियों का कहना है कि अवॉर्ड पाने के बाद उनकी जिम्मेदारियां बढ़ी हैं। वे और मेहनत करेंगे। केवल संगमनगरी ही नहीं, बल्कि प्रदेश और देश के लिए मेडल लाएंगे। वेटरन हॉकी खिलाड़ी पुष्पा श्रीवास्तव, ओलंपियन सुजीत कुमार को भी यह अवॉर्ड मिलेगा।
आदित्य सिंह राणा- जिमनास्ट
स्कूली दिनों में लगा जिमनास्टिक का चस्का
नेशनल स्पोर्ट्स एकेडमी के कोच हमारे स्कूल में आते थे। उन्हें लगा कि मैं अच्छा खेल सकता हूं तो उन्होंने मुझे रोज शाम को एकेडमी आने को कहा। मैं शाम को रोज जाने लगा। धीरे-धीरे मुझे जिमनास्ट का चस्का लग गया। मुझे जिमनास्टिक से बहुत प्यार हैं और मैं अपने खेल का लुत्फ उठा रहा हूं। प्रदेश सरकार ने मुझ अवॉर्ड के लिए चुना उसका शुक्रिया! मैं उत्साहित हूं, और अच्छा करने की कोशिश करूंगा।
योगिता कुमार - सॉफ्ट टेनिस
बचपन से था कुछ अलग करने का जज्बा
पांचवीं कक्षा से ही मेरे मन में कुछ अलग करने का जज्बा था। मैं सोचती थी कि मैं ऐसा कुछ करूं जिससे देश का भी नाम रोशन हो। कक्षा नौवीं में पहुंची तो रैकेट पकड़ लिया। वर्ल्ड चैंपियनशिप खेला। तब मुझे इसका एहसास हुआ कि मैं भी देश के लिए कुछ कर सकती हूं। मुझे खुशी है और गर्व भी महसूस हो रहा है कि प्रदेश सरकार ने मुझे अवॉर्ड केलिए चुना। मैं मुख्यमंत्री को धन्यवाद देती हूं।
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ऋतुषा आर्या - हॉकी
बचपन से ही खेल में जाने की इच्छा
हॉकी मेरा बचपन का शौक है। 2004 में गोरखपुर में हॉकी की नर्सरी खुली तो मैंने मम्मी-पापा से कहकर प्रवेश ले लिया। तभी से मेरी शुरूआत हुई। मैंने चंडीगढ़ हॉकी एकेडमी और उसके बाद भोपाल में सेंटर फॉर एक्सीलेंस नामक सेंटर में प्रवेश लिया। कोच राजेंद्र सिंह ने मेरा बहुत सपोर्ट किया। अवार्ड के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद। मैं बहुत खुश हूं। इस सम्मान के बाद मेरी जिम्मेदारियां और बढ़ गई है।
सृष्टि अग्रवाल - हैंडबाल
मेरे पास हैंडबाल के अलावा कोई और विकल्प नहीं
तीन जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप और नौ सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप खेल चुकी सृष्टि अग्रवाल 2010 में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर साउथ अफ्रीका में पहला इंटरनेशनल मैच खेला। उन्होंने नैनी से अपने खेल की शुरूआत की। सृष्टि कहती हैं कि उनके समय में नैनी में और कोई खेल नहीं हो रहा था। इंडिया टीम की कैप्टन भी रह चुकी सृष्टि अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। कहा कि वह आगे देश के लिए और मेडल लाना चाहती हैं।
देर से ही पर सरकार ने किया सम्मान
वेटरन खिलाड़ियों में संगम नगरी के दो खिलाड़ियों को अवार्ड मिलने जा रहा है। इसमें ओलंपियन सुजीत कुमार और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पुष्पा श्रीवास्तव का नाम शामिल है। अवॉर्ड की सूचना मिलने के बाद जब इन दोनों वेटरन खिलाड़ियों से बातचीत की गई तो दोनों की प्रतिक्रिया रही कि देर से ही सही पर सरकार ने उनके योगदानों को ख्याल किया। यह उनके लिए सम्मान की बात है। सुजीत कुमार वर्तमान में लखनऊ में एयर इंडिया में स्टेशन प्रबंधक हैं, जबकि पुष्पा श्रीवास्तव रेलवे में ऑफिसर हैं। पुष्पा ने 1981 से हॉकी खेलना शुरू किया। 1986 में दक्षिण कोरिया के सियोल में हुए एशियन गेम्स में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। टीम ने इस प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता था। 1985 में हुई इंदिरा गांधी गोल्ड कप अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का अवॉर्ड दिया गया जबकि सुजीत कुमार ने 1988 ओलंपिक में हिस्सा लिया था।
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आदित्य सिंह राणा- जिमनास्ट
स्कूली दिनों में लगा जिमनास्टिक का चस्का
नेशनल स्पोर्ट्स एकेडमी के कोच हमारे स्कूल में आते थे। उन्हें लगा कि मैं अच्छा खेल सकता हूं तो उन्होंने मुझे रोज शाम को एकेडमी आने को कहा। मैं शाम को रोज जाने लगा। धीरे-धीरे मुझे जिमनास्ट का चस्का लग गया। मुझे जिमनास्टिक से बहुत प्यार हैं और मैं अपने खेल का लुत्फ उठा रहा हूं। प्रदेश सरकार ने मुझ अवॉर्ड के लिए चुना उसका शुक्रिया! मैं उत्साहित हूं, और अच्छा करने की कोशिश करूंगा।
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योगिता कुमार - सॉफ्ट टेनिस
बचपन से था कुछ अलग करने का जज्बा
पांचवीं कक्षा से ही मेरे मन में कुछ अलग करने का जज्बा था। मैं सोचती थी कि मैं ऐसा कुछ करूं जिससे देश का भी नाम रोशन हो। कक्षा नौवीं में पहुंची तो रैकेट पकड़ लिया। वर्ल्ड चैंपियनशिप खेला। तब मुझे इसका एहसास हुआ कि मैं भी देश के लिए कुछ कर सकती हूं। मुझे खुशी है और गर्व भी महसूस हो रहा है कि प्रदेश सरकार ने मुझे अवॉर्ड केलिए चुना। मैं मुख्यमंत्री को धन्यवाद देती हूं।
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ऋतुषा आर्या - हॉकी
बचपन से ही खेल में जाने की इच्छा
हॉकी मेरा बचपन का शौक है। 2004 में गोरखपुर में हॉकी की नर्सरी खुली तो मैंने मम्मी-पापा से कहकर प्रवेश ले लिया। तभी से मेरी शुरूआत हुई। मैंने चंडीगढ़ हॉकी एकेडमी और उसके बाद भोपाल में सेंटर फॉर एक्सीलेंस नामक सेंटर में प्रवेश लिया। कोच राजेंद्र सिंह ने मेरा बहुत सपोर्ट किया। अवार्ड के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद। मैं बहुत खुश हूं। इस सम्मान के बाद मेरी जिम्मेदारियां और बढ़ गई है।
सृष्टि अग्रवाल - हैंडबाल
मेरे पास हैंडबाल के अलावा कोई और विकल्प नहीं
तीन जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप और नौ सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप खेल चुकी सृष्टि अग्रवाल 2010 में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर साउथ अफ्रीका में पहला इंटरनेशनल मैच खेला। उन्होंने नैनी से अपने खेल की शुरूआत की। सृष्टि कहती हैं कि उनके समय में नैनी में और कोई खेल नहीं हो रहा था। इंडिया टीम की कैप्टन भी रह चुकी सृष्टि अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। कहा कि वह आगे देश के लिए और मेडल लाना चाहती हैं।
देर से ही पर सरकार ने किया सम्मान
वेटरन खिलाड़ियों में संगम नगरी के दो खिलाड़ियों को अवार्ड मिलने जा रहा है। इसमें ओलंपियन सुजीत कुमार और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पुष्पा श्रीवास्तव का नाम शामिल है। अवॉर्ड की सूचना मिलने के बाद जब इन दोनों वेटरन खिलाड़ियों से बातचीत की गई तो दोनों की प्रतिक्रिया रही कि देर से ही सही पर सरकार ने उनके योगदानों को ख्याल किया। यह उनके लिए सम्मान की बात है। सुजीत कुमार वर्तमान में लखनऊ में एयर इंडिया में स्टेशन प्रबंधक हैं, जबकि पुष्पा श्रीवास्तव रेलवे में ऑफिसर हैं। पुष्पा ने 1981 से हॉकी खेलना शुरू किया। 1986 में दक्षिण कोरिया के सियोल में हुए एशियन गेम्स में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। टीम ने इस प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता था। 1985 में हुई इंदिरा गांधी गोल्ड कप अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का अवॉर्ड दिया गया जबकि सुजीत कुमार ने 1988 ओलंपिक में हिस्सा लिया था।