UPPSC : स्थापना वर्ष में आयोग ने की थी 332 पदों पर भर्ती, पिछले वर्ष 12,501 को नौकरी
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की स्थापना एक अप्रैल 1937 को हुई थी। शिक्षा निदेशालय इसका मुख्यालय हुआ करता था और 1962 में यह वर्तमान परिसर में आया। आयोग के पहले अध्यक्ष आईसीएस डीएल ड्रेक ब्रॉकमैन थे। उनके साथ दो सदस्यों राय बहादुर मान सिंह एवं खान बहादुर सैय्यद अबू मोहम्मद की नियुक्ति की गई थी।
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स्थापना वर्ष 1937 में 332 पदों पर भर्ती करने वाले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने 2022-23 में 12 हजार से अधिक लोगों को नौकरी दी है। आयोग आज अपना 87वां स्थापना दिवस मानने जा रहा है। दो भर्तियों से शुरू हुआ आयोग अब नियमित तौर पर 11 तरह की भर्तियां कराता है।
आयोग की स्थापना एक अप्रैल 1937 को हुई थी। शिक्षा निदेशालय इसका मुख्यालय हुआ करता था और 1962 में यह वर्तमान परिसर में आया। आयोग के पहले अध्यक्ष आईसीएस डीएल ड्रेक ब्रॉकमैन थे। उनके साथ दो सदस्यों राय बहादुर मान सिंह एवं खान बहादुर सैय्यद अबू मोहम्मद की नियुक्ति की गई थी। वहीं आजाद भारत में आयोग के पहले अध्यक्ष प्रो. अमरनाथ झा थे। जो इलाहाबाद विश्वविद्यालय एवं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे।
आयोग ने प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) और प्रांतीय पुलिस सेवा (पीपीएस) से भर्तियों की शुरुआत की थी। पहले वर्ष पीपीएस के एक पद के लिए 72 आवेदन आए थे। वहीं पीसीएस के 11 पदों के लिए 244 लोगों ने आवेदन किया था। इनके अलावा आयोग ने कुल 320 पदों पर भर्ती की।
वहीं आज आयोग 11 तरह की भर्तियां कर रहा है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 2022-23 में आयोग ने 12,501 पदों के लिए भर्ती की। इन भर्तियों के लिए 15,29,728 प्रतियोगियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से 13,29,728 ने परीक्षा दी थी। वहीं 14,173 अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार में हिस्सा लिया था। पिछले पांच वर्ष के आंकड़ों को देखें तो आयोग ने इस दौरान कुल 58,186 पदों के सापेक्ष भर्ती की है। इन भर्तियों के लिए 94,38,310 आवेदन पहुंचे थे। 11,99,736 ने परीक्षा दी। इनमें से 81,1447 को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था।
ऑनलाइन व्यवस्था के साथ लागू हुआ ओटीआर
आयोग में आवेदन समेत अन्य प्रक्रिया ऑनलाइन हो गई है। अभ्यर्थियों की सहूलियत के लिए आयोग ने अक्तूबर 2022 में ओटीआर (एकल पंजीकरण) की व्यवस्था लागू की। इसे अभ्यर्थियों के लिए अनिवार्य भी कर दिया गया है। इसके तहत ओटीआर के बाद अभ्यर्थियों को अलग-अलग भर्तियों के लिए फॉर्म भरते समय बार-बार पूरे विवरण नहीं देने होंगे। इस व्यवस्था के तहत 18,38,932 प्रतियोगियों ने पंजीकरण कराया है।
भर्ती प्रक्रिया में आई तेजी लेकिन पेपर आउट होने का भी लगा कलंक
आयोग में तकनीकी के इस्तेमाल व अन्य सुधारों के बाद भर्ती प्रक्रिया में तेजी आई है। पीसीएस की भर्ती प्रक्रिया भी एक साल में पूरी कर ली गई लेकिन पेपर आउट होने का कलंक भी लगा। आरओ-एआरओ प्रारंभिक परीक्षा 2023 का पेपर आउट होने का आरोप भी लगा है। इसके बाद परीक्षा स्थगित कर दी गई। इससे पहले पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2015 का पेपर भी आउट हो चुका है। प्रिंटिंग प्रेस से ही पेपर लीक होने समेत कई अन्य शिकायतें भी रहीं हैं।
बीच में आयोग की स्थिति काफी खराब हो गई थी। भर्तियां पूरी होने में वर्षों लग जाते थे लेकिन अब काफी सुधार देखने को मिला है। समय से भर्ती प्रक्रिया पूरी की जा रही है। आरओ-एआरओ परीक्षा को छोड़ दें तो भर्तियों में पारदर्शिता की बात भी कही जा रही है। यह तकनीकी का दौर है। इसमें पेपर आउट होने की आशंका बढ़ जाती है। आरओ-एआरओ में भी वही होता दिख रहा है। आशा है आयोग इस दिशा में सोच भी रहा होगा। इसके अलावा सख्ती भी करनी होगी। - प्रोफेसर केबी पांडेय, पूर्व अध्यक्ष
आरओ-एआरओ प्री निरस्त करने का अधिसूचना तथा कैलेंडर जारी करने की मांग
आरओ-एआरओ प्रारंभिक परीक्षा निरस्त होने के एक महीने बाद भी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से इस बाबत अधिसूचना जारी नहीं की गई। इसके अलावा परीक्षा की नई तिथि भी घोषित नहीं की गई है। इस पर प्रतियोगियों में नाराजगी है। युवा मंच के बैनर तले प्रतियोगियों ने सोशल मीडिया पर अभियान भी चला रखा है। मंच के अध्यक्ष अनिल सिंह ने आरओ-एआरओ परीक्षा निरस्त करने संबंधी नोटिस जारी करने की मांग की। अनिल का कहना है कि आयोग ने पीसीएस समेत कई भर्तियों की परीक्षाएं भी निरस्त कर दी हैं। उन्होंने आयोग की ओर से परीक्षाओं का संशोधित कैलेंडर जारी करने की भी मांग की।