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हाईकोर्ट : सार्वजनिक स्थानों से धार्मिक स्थलों को हटाने के मामले में केंद्र, राज्य से मांगा जवाब
Thu, 03 Nov 2022 11:15 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 03 Nov 2022 11:15 PM IST
सार
यह आदेश चीफ जस्टिस राजेश बिंदल तथा जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ ने जन उद्घोष सेवा संस्थान एवं पांच अन्य बनाम भारत सरकार तथा अन्य की याचिका पर पारित किया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में स्थित रेलवे स्टेशनों, सड़कों, पार्को व अन्य सार्वजनिक स्थानों से मजारों तथा अन्य धार्मिक स्थलों को हटाने को लेकर दाखिल एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तथा उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट में इस जनहित याचिका पर 15 दिसंबर को सुनवाई होगी।
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यह आदेश चीफ जस्टिस राजेश बिंदल तथा जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ ने जन उद्घोष सेवा संस्थान एवं पांच अन्य बनाम भारत सरकार तथा अन्य की याचिका पर पारित किया। याचिका दाखिल कर मांग की गई है कि कानपुर, लखनऊ समेत प्रदेश के अन्य रेलवे स्टेशनों, पटरियों के किनारे और कहीं पर बीच में भी मजारें बनी हुई हैं। कहा गया कि सार्वजनिक स्थलों पर हुए इस प्रकार के निर्माणों से दुर्घटना की प्रबल संभावना रहती है, अत: सार्वजनिक स्थानों से ऐसे निर्माणों को हटाया जाए।
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भारत सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया एसपी सिंह ने कोर्ट को बताया कि लखनऊ रेलवे स्टेशन, कानपुर रेलवे स्टेशन पर बनीं मजारें बहुत पुराने समय से चली आ रही हैं। उन्होंने इसे हटाने के लिए एक नीति बनाकर निर्णय लेने के लिए कोर्ट से कुछ समय की मांग की। अदालत ने इस पर समय देते हुए कहा, केंद्र सरकार का रेलवे मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में अपना जवाब 15 दिसंबर 2022 तक दाखिल करे। कोर्ट इस याचिका की अगली सुनवाई 15 दिसंबर 2022 को करेगी।
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