सामान्य मामलों में अवमानना पर स्वत: संज्ञान नहीं लेगी कोर्ट
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हाईकोर्ट ने अवमानना के मामले में साफ किया है कि जहां अवमानना की कार्रवाई चलाने की अनुमति महाधिवक्ता द्वारा प्रदान नहीं की गई है, वहां अदालत अवमानना पर स्वत: संज्ञान नहीं लेगी। ऐसा तभी किया जा सकता है, जब न्याय प्रशासन के क्रियान्वयन या न्याय के निष्पादन को गंभीर क्षति पहुंचायी गई हो।
सामान्य मामलों में अदालत स्वत: संज्ञान लेकर अवमानना याचिका की सुनवाई नहीं करेगी। माधव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और गिरिराज किशोर शर्मा की अवमानना याचिकाओं को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति हर्षकुमार की पीठ ने यह व्यवस्था दी।
खंडपीठ ने सर्वोच्च अदालत के मुत्थु करप्पन बनाम पार्थी केस का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीमकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि जब तक अवमानना का गंभीर मामला न बनता हो अदालतों को अवमानना याचिकाओं पर स्वत: संज्ञान नहीं लेना चाहिए। सामान्य मामलों में सरकार या महाधिवक्ता की अनुमति होने पर ही संज्ञान लिया जाएगा।