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हाईकोर्ट का अहम फैसला : आरोपपत्र जारी होने पर नियुक्ति के लिए अपराध से बरी होना आवश्यक
Tue, 26 Apr 2022 10:45 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 26 Apr 2022 10:45 PM IST
सार
याची ने चयन की सारी बाधाएं पार कर लीं, लेकिन अंतिम नियुक्ति में उसके आचरण ने स्वयं ही अवरोध उत्पन्न कर दिया। उसके खिलाफ अपहरण, धोखाधड़ी, षड्यंत्र, नाबालिग से दुष्कर्म करने के गंभीर आरोप में पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को पुलिस विभाग में नियुक्ति न कराने के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस का चरित्र व विश्वसनीयता सही होनी चाहिए। अपराध में बरी होने तक नियुक्ति पाने का अधिकार नहीं है। स्क्रीनिंग कमेटी के फैसले पर हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने सुधीर कुमार की याचिका पर दिया है।
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याची ने चयन की सारी बाधाएं पार कर लीं, लेकिन अंतिम नियुक्ति में उसके आचरण ने स्वयं ही अवरोध उत्पन्न कर दिया। उसके खिलाफ अपहरण, धोखाधड़ी, षड्यंत्र, नाबालिग से दुष्कर्म करने के गंभीर आरोप में पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इससे पहले कोर्ट ने अवतार सिंह केस के फैसले के आलोक में विचार करने का निर्देश दिया था। उसे अस्वीकार कर दिया गया तो यह याचिका दायर की गई। याची को नियुक्त करने की अनुमति नहीं दी गई।
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