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High Court : आरोपों की प्रकृति संदिग्ध तो सेशन कोर्ट पुन: जांच के आदेश दे सकता है, ट्रायल कोर्ट का फैसला सही
Wed, 15 Apr 2026 12:36 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 15 Apr 2026 12:36 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपों की प्रकृति संदिग्ध लगे तो सेशन कोर्ट पुन: जांच के आदेश दे सकता है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अनिल कुमार-दशम की एकल पीठ आपराधिक मामले में पुनरीक्षण न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपों की प्रकृति संदिग्ध लगे तो सेशन कोर्ट पुन: जांच के आदेश दे सकता है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अनिल कुमार-दशम की एकल पीठ आपराधिक मामले में पुनरीक्षण न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। इसरार ने सहारनपुर के थाना कोतवाली देहात में कबीर व अन्य के खिलाफ दंगा-मारपीट के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। इस पर सहारनपुर के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपियों को तलब करने (समन) का आदेश दिया था। आरोपियों ने पुनरीक्षण याचिका दाखिल की।
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सहारनपुर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) ने 15 जनवरी 2025 को आदेश पारित करते हुए समन आदेश रद्द कर दिया। साथ ही ट्रायल कोर्ट को मामले की दोबारा जांच कर निर्णय लेने का निर्देश दिया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट का समन आदेश पूरी तरह उचित और ठोस आधार पर था। पुनरीक्षण न्यायालय ने बिना पर्याप्त कारण बताए आदेश में हस्तक्षेप कर दिया। इसलिए पुनरीक्षण न्यायालय का आदेश निरस्त किया जाए।
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शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि आरोपों की प्रकृति को देखते हुए मामले की गहन जांच जरूरी थी। पुनरीक्षण न्यायालय ने विधिसम्मत आदेश पारित किया है। कोर्ट ने कहा कि पुनरीक्षण न्यायालय की ओर से जांच कराने का निर्देश देना उचित है। शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया कुछ असामान्य और बढ़ा-चढ़ाकर प्रतीत होते हैं, जिनकी पुष्टि आवश्यक है।
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