संदेह के घेरे में फिर आई आरआरबी परीक्षा
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आरआरबी इलाहाबाद की ओर से स्टेशन मास्टर, गुड्स गार्ड, इनक्वायरी कम रिजर्वेशन क्लर्क समेत रेलवे के तमाम लोकप्रिय संवर्गों के 18252 पदों के लिए सभी 21 रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) द्वारा ऑनलाइन परीक्षा ली जा रही है। परीक्षा सोमवार 28 मार्च से शुरू हुई है जो 30 अप्रैल तक चलनी है। परीक्षा के लिए कई शहरों में केंद्र बनाए गए हैं। इस बीच शुक्रवार को एसटीएफ इलाहाबाद ने आरआरबी चेयरमैन एनपी सिन्हा को सूचना दी कि उसने कुछ लोगों को ऑनलाइन पेपर के सेट के साथ पकड़ा है। एसटीएफ ने यह भी बताया कि प्रश्नपत्र दोपहर की पॉली शुरू होने से पहले लीक हुआ और उसे इलाहाबाद से ही बरामद किया गया है।
यह सूचना मिलते ही आरआरबी प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन फानन में एसटीएफ को बरामद प्रश्नपत्र की की ऑनलाइन पेपर से आरआरबी ने जांच भी करवाई। जांच के बाद आरआरबी इलाहाबाद के चेयरमैन एनपी सिन्हा ने सिर्फ इतना ही कहा कि अभ्यर्थियों को गुमराह करने के लिए ही प्रश्नपत्र बनाया गया है। क्योंकि उसके क्वेशचन पेपर में जो प्रश्न पूछे गए हैं उसके ऑप्शन ऑनलाइन पेपर के ऑप्शन से उनका मेल नहीं खा रहे हैं। स्क्रीन शॉट भी मैच कराया गया है। चेयरमैन का दावा है कि ऑनलाइन पेपर लिए जाने की व्यवस्था में गड़बड़ी नहीं हो सकती। तीन पॉलियों में ली जाने वाली इस परीक्षा में हर एक शिफ्ट में अलग प्रश्नपत्र रहते हैं। फिलहाल इस मामले की जांच आरआरबी की टेक्निकल टीम कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में कुछ कहा जाएगा।
आरआरबी इलाहाबाद की ओर से आयोजित पहली बार बृहद स्तर पर ली जा रही ऑनलाइन परीक्षा के केंद्र को लेकर शुरू से ही तमाम चर्चाएं रहीं। दरअसल ऑनलाइन परीक्षा के लिए आरआरबी को ऐसे केंद्र चाहिए थे जहां पर्याप्त संख्या में कंप्यूटर आदि लगे हाें। इसके लिए आरआरबी ने इलाहाबाद, कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़ आदि शहरों में ऐसे संस्थानों को परीक्षा केंद्र बना दिया जहां कंप्यूटर आदि लगे हुए थे। इसमें से अधिकांश प्राइवेट संस्थान ही रहे। परीक्षा कराने के लिए आरआरबी इलाहाबाद को बड़े तकनीकी संस्थान काफी कम मिल सके। इलाहाबाद में रसूलाबाद चौराहे पर स्थित एक केंद्र को भी आरआरबी ने परीक्षा केंद्र बनाया है। चर्चा इस बात की भी है कि इस तरह के तमाम केंद्रों में ऑनलाइन परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों से पैसा लेकर मौके पर ही प्रश्नपत्र सॉल्व कराया जाता है। हालांकि आरआरबी प्रशासन ने इस बात से इंकार किया है।
आरआरबी इलाहाबाद की ऑनलाइन परीक्षा कराने वाली एजेंसी भी एसटीएफ के निशाने पर है। दरअसल इलाहाबाद समेत तमाम जिलों में हो रही ऑनलाइन परीक्षा आरआरबी एक एजेंसी के माध्यम से करवा रहा है। परीक्षा 30 अप्रैल तक चलनी है। सवाल ये उठता है कि ऑनलाइन पेपर लीक कैसे हुआ। क्या एजेंसी के कुछ कर्मचारी इस मामले में लिप्त है। हालांकि आरआरबी चेयरमैन एनपी सिन्हा इस बारे में सिर्फ इतना ही कह रहे हैं कि अभी जांच पूरी होने तक कुछ भी नहीं कहा जा सकता। बता दें कि परीक्षा कराने के बाद संबंधित एजेंसी आरआरबी प्रशासन को रिपोर्ट देती है कि परीक्षा में कितने अभ्यर्थी शामिल हुए।
रेल भर्ती बोर्ड (आरआरबी) इलाहाबाद की भर्ती परीक्षाओं में नकल माफियाओं की सांठ गांठ की बात कोई नई नहीं है। इसके पहले भी आरआरबी इलाहाबाद पर पेपर लीक का दाग लग चुका है। वर्ष 2008 के दिसंबर माह में आयोजित आरआरबी इलाहाबाद की ओर से आयोजित भर्ती परीक्षा में भी पेपर लीक प्रकरण का मामला सामने आया था। तब यहां असिस्टेंट लोको पॉयलट की भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हो गया था। इस वजह से भर्ती बोर्ड ने यह परीक्षा रद भी कर दी। जुलाई 2014 में भी एसटीएफ ने इलाहाबाद और लखनऊ के नौ परीक्षा केंद्रों पर ब्लू टूथ हेड सेट के माध्यम से परीक्षार्थियों के नकल करने की सूचना आरआरबी प्रशासन को दी।
13 जुलाई 2014 को आयोजित आरआरबी की भर्ती परीक्षा में एसटीएफ ने आरआरबी के अफसरों को परीक्षा केंद्रों में ब्लू टूथ हेड सेट के माध्यम से नकल होने की सूचना दी। इस वाकये के बाद आरआरबी की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न जरूर लग गया है। आरआरबी इलाहाबाद की बात करें तो यहां पूर्व अध्यक्ष सरजू प्रसाद सरोज के कार्यकाल में बोर्ड पर आरोप लगा था कि परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिका वहां बदली जाती है। इस वजह से 2001 में बोर्ड की पूरी कार्य पद्धति बदली गई।
इसके बाद दिसंबर 2008 में आरआरबी चेयरमैन पीके सांघी के कार्यकाल के दौरान एसटीएफ द्वारा झूंसी के कोहना स्थित पुरी आश्रम में छापा मारकर दर्जनों परीक्षार्थियों को नकल करने के आरोप में पकड़ा गया। उस प्रकरण में रेलवे के एक टीटीई पर्चा लीक कराने का आरोप लगा। उसे रेलवे ने बर्खास्त कर दिया था। पेपर लीक होने के बाद आरआरबी चेयरमैन पीके सांघी को यहां से हटा दिया गया था। उनकी भूमिका को भी लेकर तब तमाम सवाल खड़े हुए थे। इस मामले की सीबीआई जांच भी चली। इसके बाद वर्ष 2014 में चेयरमैन संजीव माथुर के कार्यकाल भी पेपर लीक की बात सामने आई थी।