Prayagraj : हिरासत में दी गई यातना पर मानवाधिकार आयोग सख्त, पुलिस कमिश्नर से तलब की रिपोर्ट
मामला थरवई थाना क्षेत्र का है। 17 नवंबर की रात सादे कपड़ों में जाम छुड़ाने गए दरोगा को अगवा कर पिटाई करने के आरोप में सीआरपीएफ के हवलदार सत्यनारायण सिंह यादव और उसके बेटे अनुराग यादव को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
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राज्य मानवाधिकार आयोग ने दरोगा को पीटने व लूट के आरोपी सीआरपीएफ के हवलदार और उसके बेटे को हिरासत में दी गई यातना पर पुलिस आयुक्त प्रयागराज को नोटिस जारी कर 24 दिसंबर तक जांच रिपोर्ट तलब की है। यह आदेश मानवाधिकार आयोग ने अधिवक्ता प्रवीण कुमार सोनी की ओर से अमर उजाला में प्रकाशित खबर संग दाखिल शिंकायती पत्र का संज्ञान लेते हुए दिया है। इससे पहले इस मामले में जिला अदालत के रिमांड मजिस्ट्रेट ने पुलिस आयुक्त को मामले की जांच करने और रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था।
मामला थरवई थाना क्षेत्र का है। 17 नवंबर की रात सादे कपड़ों में जाम छुड़ाने गए दरोगा को अगवा कर पिटाई करने के आरोप में सीआरपीएफ के हवलदार सत्यनारायण सिंह यादव और उसके बेटे अनुराग यादव को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद दोनों को रिमांड के लिए मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया। रिमाडं अर्जी संग पेश हुई मेडिकल रिपोर्ट में आरोपियों के शरीर पर कोई भी चोट नहीं दर्शायी गई थी, जबकि अदालत में पेश आरापियों ने अपने कपड़े उतार कर दिखाया तो कोर्ट ने पाया कि शरीर पर चोट के निशान साफ दिखाई दे रहे थे।
सत्यनारायण का बायां हाथ सूजा हुआ था और अनुराग का बायां पैर भी सूजा हुआ था। अनुराग जब अदालत कक्ष में दाखिल हुए तो वह भी लंगड़ाते हुए चल रहा था। साथ ही गिरफ़्तारी और बरामदगी से जुड़ा वीडियो कोर्ट में चलाया गया। कोर्ट ने पाया कि वीडियो अंधेरे बनाया गया था, जिसमें न तो आरोपी का चेहरा और शरीर दिखा रहा था न ही बरामद सामान। कोर्ट ने चोटों और वीडियों के बारे में विवेचक से पूछा तो विवेचक जबाव नहीं दे सका। खफा कोर्ट ने पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज कर आरोपी पिता-पुत्र को जमानत पर रिहा कर पुलिस आयुक्त को पुलिस यातना की जांच करने का आदेश दिया है। अब राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लिया है।