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हाईकोर्ट ने पूछा : 1997 की हिस्ट्रीशीट कैसे रही जारी, UP सरकार द्वारा जानकारी न देने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
Wed, 21 Jun 2023 04:36 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 21 Jun 2023 04:36 PM IST
सार
कोर्ट ने अपने एक जून 2023 के आदेश में सरकारी अधिवक्ता से याची के बारे में जानकारी मांगी थी। अपर शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया याची के खिलाफ 18 आपराधिक केस का इतिहास है। किंतु वह यह नहीं बता सके कि इन केसों का परिणाम क्या रहा।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के शोएब इब्राहिम की हिस्ट्रीशीट खोलने के बाद समीक्षा न करने के आरोप में दाखिल याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका को सुनवाई के लिए 26 जून को पेश करने का निर्देश दिया है।
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कोर्ट ने अपने एक जून 2023 के आदेश में सरकारी अधिवक्ता से याची के बारे में जानकारी मांगी थी। अपर शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया याची के खिलाफ 18 आपराधिक केस का इतिहास है। किंतु वह यह नहीं बता सके कि इन केसों का परिणाम क्या रहा। यह बताने में भी असमर्थ रहे कि 11 अप्रैल 1997 को हिस्ट्रीशीट खोलने के बाद वह लगातार हिस्ट्रीशीटर कैसे बना रहा। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा तथा न्यायमूर्ति ए के सिंह देशवाल की खंडपीठ ने शोएब इब्राहिम की याचिका पर दिया है।
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याची का कहना था कि 11 अप्रैल 1997 को उसकी हिस्ट्रीशीट खोली गई। उत्तर प्रदेश पुलिस रेग्यूलेशन 231 के अनुसार हर दो वर्ष पर हिस्ट्रीशीट पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। ऐसा न कर याची के मानवाधिकार व मूल अधिकारों का हनन किया गया है। कोर्ट ने इस पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
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