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बिना चीरा लगाए आंत के उतरने का उपचार संभव
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Hornia Operation
प्रयागराज। हार्निया का बिना चीरा लगाए दूरबीन विधि से सटीक उपचार अब संभव है। इस विधि से मरीज को जल्द ही परेशानी से छुटकारा मिल सकता है। इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन सभागार में शनिवार से शुरू हुई कांफ्रेंस में देश भर से आए विशेषज्ञों ने हार्निया के उपचार की नई विधियों के बारे में विस्तार से चर्चा की।
भारतीय हार्निया सोसाइटी एवं मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के पीजी सर्जरी विभाग के तत्वावधान में आयोजित कांफ्रेंस में बीएचयू के डॉ.अजय खन्ना ने विभिन्न प्रकार की हार्निया के बारे में बताया। विशषज्ञों ने उपचार की तमाम विधियों पर चर्चा करते हुए बिना चीरा लगाए दूरबीन विधि से आपरेशन पर खास तौर से बात की। विशेषज्ञों के मुताबिक पूरे एशिया में महज 5 फीसदी मरीजों का दूरबीन विधि से उपचार होता है, जबकि यह काफी विश्वसनीय विधि है। इसके प्रचलित न होने के पीछे प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी एवं पर्याप्त संसाधनों के न होने की वजह बताई गई। इसके पहले हार्निया पीड़ित सात गंभीर रोगियों का लाइव आपरेशन हुआ, जिसे छात्रों ने गंभीरता से देखा। आपरेशन करने वाले चिकित्सकों में वरिष्ठ शल्य चिकित्सक डॉ.एमसी मिश्र पूर्व निदेशक एम्स, डॉ.वीके बंसल, डॉ.केएन श्रीवास्तव, डॉ.एसडी मौर्या, डॉ.सरफराज बेग एवं डॉ.कृपलानी शामिल रहे।
दूसरे सत्र में मोटे लोगों में हार्निया आपरेशन को लेकर पेश आने वाली समस्याओं पर भी चर्चा हुई। डा.वीके बंसल ने वेंट्रल हार्निया के विविध पहलुओं के बारे में बताया। इसके पहले पद्मश्री डॉ.प्रदीप चौबे ने कांफ्रेंस का उद्घाटन किया। प्रधानाचार्य डॉ.एसपी सिंह ने हार्निया की बढ़ रही समस्या को देखते हुए ऐसे आयोजन को महत्वपूर्ण बताया। इस दौरान डॉ.वीके पांडेय, डॉ.वैभव श्रीवास्तव, डॉ.प्रबल नियोगी, डॉ.आरके चौधरी, डॉ.मंयक सिंह, डॉ.जेके सिंह समेत अन्य उपस्थित थे। संयोजक डॉ.शबी अहमद के मुताबिक रविवार को तकनीकी सत्र आयोजित होगा।
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क्या है हार्निया
शरीर का कोई अंग जब अपने खोल अथवा झिल्ली से बाहर निकल आता है, तब उसे हार्निया कहते हैं। इसमें मरीज को तेज दर्द होता है, चलने-फिरने में दिक्कत होती है। आमतौर पर शरीर के किसी हिस्से की पेशियों के कमजोर अथवा वहां दबाव पड़ने से यह दिक्कत होती है। हार्निया कई तरीके की होती है, लेकिन मरीजों में आंत उतर जाने की बीमारी सामान्य तौर पर देखी जाती है। सामान्य कामकाज करने वाला व्यक्ति भी इससे पीड़ित हो जाता है।
मोटेे लोगों में हार्निया का खतरा अधिक
हार्निया शरीर के भीतर दबाव पड़ने पर होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक मोटे लोगों में हार्निया का खतरा सबसे अधिक होता है। उनके भीतरी अंग मोटपे की वजह से सिस्ट से बाहर निकल आते हैं। इसके अलावा सर्जरी, अधिक समय तक रहने वाली खांसी, कब्ज, बढ़ती उम्र, वेटलिफ्ंिटग, अधिक सीढ़िया चढ़ने-उतरने से भी यह समस्या पेश आती है। विशेषज्ञों का कहना है अमूमन इसका इलाज सिर्फ आपरेशन ही है। दवाओं का कोई खास रोल नहीं होता। सर्जरी के दौरान क्षतिग्रस्त सिस्ट के बाहर जाल बांधा जाता है।
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भारतीय हार्निया सोसाइटी एवं मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के पीजी सर्जरी विभाग के तत्वावधान में आयोजित कांफ्रेंस में बीएचयू के डॉ.अजय खन्ना ने विभिन्न प्रकार की हार्निया के बारे में बताया। विशषज्ञों ने उपचार की तमाम विधियों पर चर्चा करते हुए बिना चीरा लगाए दूरबीन विधि से आपरेशन पर खास तौर से बात की। विशेषज्ञों के मुताबिक पूरे एशिया में महज 5 फीसदी मरीजों का दूरबीन विधि से उपचार होता है, जबकि यह काफी विश्वसनीय विधि है। इसके प्रचलित न होने के पीछे प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी एवं पर्याप्त संसाधनों के न होने की वजह बताई गई। इसके पहले हार्निया पीड़ित सात गंभीर रोगियों का लाइव आपरेशन हुआ, जिसे छात्रों ने गंभीरता से देखा। आपरेशन करने वाले चिकित्सकों में वरिष्ठ शल्य चिकित्सक डॉ.एमसी मिश्र पूर्व निदेशक एम्स, डॉ.वीके बंसल, डॉ.केएन श्रीवास्तव, डॉ.एसडी मौर्या, डॉ.सरफराज बेग एवं डॉ.कृपलानी शामिल रहे।
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दूसरे सत्र में मोटे लोगों में हार्निया आपरेशन को लेकर पेश आने वाली समस्याओं पर भी चर्चा हुई। डा.वीके बंसल ने वेंट्रल हार्निया के विविध पहलुओं के बारे में बताया। इसके पहले पद्मश्री डॉ.प्रदीप चौबे ने कांफ्रेंस का उद्घाटन किया। प्रधानाचार्य डॉ.एसपी सिंह ने हार्निया की बढ़ रही समस्या को देखते हुए ऐसे आयोजन को महत्वपूर्ण बताया। इस दौरान डॉ.वीके पांडेय, डॉ.वैभव श्रीवास्तव, डॉ.प्रबल नियोगी, डॉ.आरके चौधरी, डॉ.मंयक सिंह, डॉ.जेके सिंह समेत अन्य उपस्थित थे। संयोजक डॉ.शबी अहमद के मुताबिक रविवार को तकनीकी सत्र आयोजित होगा।
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क्या है हार्निया
शरीर का कोई अंग जब अपने खोल अथवा झिल्ली से बाहर निकल आता है, तब उसे हार्निया कहते हैं। इसमें मरीज को तेज दर्द होता है, चलने-फिरने में दिक्कत होती है। आमतौर पर शरीर के किसी हिस्से की पेशियों के कमजोर अथवा वहां दबाव पड़ने से यह दिक्कत होती है। हार्निया कई तरीके की होती है, लेकिन मरीजों में आंत उतर जाने की बीमारी सामान्य तौर पर देखी जाती है। सामान्य कामकाज करने वाला व्यक्ति भी इससे पीड़ित हो जाता है।
मोटेे लोगों में हार्निया का खतरा अधिक
हार्निया शरीर के भीतर दबाव पड़ने पर होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक मोटे लोगों में हार्निया का खतरा सबसे अधिक होता है। उनके भीतरी अंग मोटपे की वजह से सिस्ट से बाहर निकल आते हैं। इसके अलावा सर्जरी, अधिक समय तक रहने वाली खांसी, कब्ज, बढ़ती उम्र, वेटलिफ्ंिटग, अधिक सीढ़िया चढ़ने-उतरने से भी यह समस्या पेश आती है। विशेषज्ञों का कहना है अमूमन इसका इलाज सिर्फ आपरेशन ही है। दवाओं का कोई खास रोल नहीं होता। सर्जरी के दौरान क्षतिग्रस्त सिस्ट के बाहर जाल बांधा जाता है।