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Prayagraj News: लालगोपालगंज के हर्बल रंगों से सराबोर होगी होली
Wed, 11 Feb 2026 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Wed, 11 Feb 2026 01:40 AM IST
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लालगोपालगंज में होली के लिए रंग तैयार करते कारीगर
रंगों के महापर्व होली की आहट के साथ लालगोपालगंज कस्बा अब फाल्गुन रंगत में रंगा नजर आने लगा है। यहां के थोक व्यापारियों ने होली को खास बनाने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। बाजार व लोगों की मांग के मद्देनजर रसायनों की जगह हर्बल रंगों की खेप तैयार की जा रही हैै।
लालगोपालगंज कस्बा देवी-देवताओं के वस्त्र चुनरी, कलावा, रामनामी समेत विभिन्न व्यापारिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। यह अब होली के लिए रंग बनाने का भी बड़ा केंद्र बन गया है। कस्बे के प्रमुख व्यापारी ओम केसरवानी, कामता प्रसाद व महारानीदीन की देखरेख में बड़े पैमाने पर रंग-गुलाल तैयार किए जा रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि अब समय बदल गया है। लोग गहरे व पक्के रंगों की जगह त्वचा के लिए सुरक्षित व खुशबूदार गुलाल पसंद करते हैं। इसी मांग को देखते हुए हर्बल रंग तैयार करवा रहे हैं। बताते हैं कि आर्डर पूरा करने के लिए महीने पहले तैयारी शुरू कर दी गई है। यहां के कारीगरों द्वारा बनाए गए हर्बल रंगों की मांग न केवल क्षेत्रीय बाजार तक सीमित है, बल्कि प्रतापगढ़, कौशाम्बी, फतेहपुर समेत आसपास के कई जनपदों में भेजा जाता है।
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व्यापारी गुलाबचन्द्र केसरवानी ने बताया कि वे होली की तैयारी महीनों पहले शुरू कर देते हैं। रंग बनाना एक कला है, इसमें वक्त लगता है। अगर हम पहले से स्टॉक तैयार न करें, तो होली पर्व के हफ्ते भर पहले आने वाली भारी डिमांड को पूरा करना संभव नहीं होगा।
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लालगोपालगंज कस्बा देवी-देवताओं के वस्त्र चुनरी, कलावा, रामनामी समेत विभिन्न व्यापारिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। यह अब होली के लिए रंग बनाने का भी बड़ा केंद्र बन गया है। कस्बे के प्रमुख व्यापारी ओम केसरवानी, कामता प्रसाद व महारानीदीन की देखरेख में बड़े पैमाने पर रंग-गुलाल तैयार किए जा रहे हैं।
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व्यापारियों का कहना है कि अब समय बदल गया है। लोग गहरे व पक्के रंगों की जगह त्वचा के लिए सुरक्षित व खुशबूदार गुलाल पसंद करते हैं। इसी मांग को देखते हुए हर्बल रंग तैयार करवा रहे हैं। बताते हैं कि आर्डर पूरा करने के लिए महीने पहले तैयारी शुरू कर दी गई है। यहां के कारीगरों द्वारा बनाए गए हर्बल रंगों की मांग न केवल क्षेत्रीय बाजार तक सीमित है, बल्कि प्रतापगढ़, कौशाम्बी, फतेहपुर समेत आसपास के कई जनपदों में भेजा जाता है।
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व्यापारी गुलाबचन्द्र केसरवानी ने बताया कि वे होली की तैयारी महीनों पहले शुरू कर देते हैं। रंग बनाना एक कला है, इसमें वक्त लगता है। अगर हम पहले से स्टॉक तैयार न करें, तो होली पर्व के हफ्ते भर पहले आने वाली भारी डिमांड को पूरा करना संभव नहीं होगा।