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एचओडी को बनाया बंधक, क्रेट का इंटरव्यू स्थगित
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 24 Oct 2017 01:19 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के विधि विभाग में क्रेट-2017 में धांधली का आरोप लगाते हुए छात्रों ने सोमवार को विधि के विभागाध्यक्ष (एचओडी) को उनके कार्यालय में बंधक बना लिया और धरने पर बैठ गए। छात्रों का आरोप है कि चार प्रोफेसरों के बच्चों को कॉपी का कोड बताकर प्रवेश में टॉप कराया गया। इस हंगामे के बाद क्रेट 2017-18 के 25 अक्तूबर को प्रस्तावित प्रेजेंटशन एवं साक्षात्कार को स्थगित कर दिया गया है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विधि विभाग में क्रेट 2017-18 में क्वालीफाई करने वाले 102 अभ्यर्थियों में 50 विद्यार्थियों को दूसरे चरण की परीक्षा के तहत प्रेजेंटेशन एवं साक्षात्कार के लिए 25 अक्तूबर को बुलाया गया था। 50 अभ्यर्थियों की सूची पर आपत्ति जताते हुए छात्र नेता मृत्युंजय राव परमार और राजनीश सिंह ‘ऋशू’ के नेतृत्व में तमाम छात्र सोमवार को विधि विभागाध्यक्ष के दफ्तर जा पहुंचे। छात्र विभागाध्यक्ष के कमरे के बाहर धरने पर बैठे गए और विभागाध्यक्ष की स्थिति बंधक जैसी हो गई। वह काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकल सके। इस दौरान छात्रों की विभागाध्यक्ष प्रो. सिद्धनाथ और विभाग के ही प्रो. एसके खन्ना से तीखी झड़प भी हुई।
छात्रों का आरोप था कि चार प्रोफेसरों के बच्चों को कॉपी को कोड बताकर प्रवेश में टॉप कराया गया।
साथ ही जिन 102 में से 50 अभ्यर्थियों को 25 अक्तूबर को प्रेजेंटेशन एवं साक्षात्कार के लिए बुलाया गया है, उनमें से कुछ अभ्यर्थी टॉप 50 में नहीं हैं। हालांकि इस पर छात्रों को बताया कि दूसरे चरण में भी अभ्यर्थियों को बुलाया जाएगा लेकिन छात्र यह जानने के लिए अड़े रहे कि टॉप 50 में शामिल कुछ अभ्यर्थियों को पहले चरण में क्यों छोड़ा गया। काफी देर चले हंगामे के बाद छात्रों ने धरना खत्म किया और एचओडी अपने दफ्तर से बाहर निकल सके। छात्रों ने वीसी दफ्तर में भी ज्ञापन देकर मामले की शिकायत दर्ज कराई है। मामले की जांच कराई जाए और इसके बाद प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। हंगामे के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 25 अक्तूबर को प्रस्तावित प्रेजेंटेशन एवं साक्षात्कार स्थगित कर दिया। उधर, एचओडी ने वीसी दफ्तर एवं चीफ प्रॉक्टर को पूरी घटना से अवगत करा दिया है।
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‘क्रेट 2017-18 का अगस्त में ही प्रवेश होना था। ऐसा कोई नियम नहीं है कि क्रेट में शिक्षकों के बच्चे प्रवेश नहीं ले सकते हैं। बच्चे मेधावी हैं और अच्छे नंबर लाते हैं तो चयन होगा ही। इसके बावजूद कुछ छात्रों की शिकायत पर 12 सितंबर को बाहर से दो विशेषज्ञ बुलाकर वीसी के कमेटी हॉल में कॉपियों की जांच दोबारा कराई गई थी। जांच में आरोप सही नहीं पाए गए। इसके बावजूद कुछ छात्र संतुष्ट नहीं हैं तो उनके लिए प्रवेश को ज्यादा दिनों तक टाला नहीं जा सकता। वैसे में प्रवेश में देरी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पिछड़ रही है।’
-प्रो. सिद्धनाथ, विधि के विभागाध्यक्ष
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विधि विभाग में क्रेट 2017-18 में क्वालीफाई करने वाले 102 अभ्यर्थियों में 50 विद्यार्थियों को दूसरे चरण की परीक्षा के तहत प्रेजेंटेशन एवं साक्षात्कार के लिए 25 अक्तूबर को बुलाया गया था। 50 अभ्यर्थियों की सूची पर आपत्ति जताते हुए छात्र नेता मृत्युंजय राव परमार और राजनीश सिंह ‘ऋशू’ के नेतृत्व में तमाम छात्र सोमवार को विधि विभागाध्यक्ष के दफ्तर जा पहुंचे। छात्र विभागाध्यक्ष के कमरे के बाहर धरने पर बैठे गए और विभागाध्यक्ष की स्थिति बंधक जैसी हो गई। वह काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकल सके। इस दौरान छात्रों की विभागाध्यक्ष प्रो. सिद्धनाथ और विभाग के ही प्रो. एसके खन्ना से तीखी झड़प भी हुई।
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छात्रों का आरोप था कि चार प्रोफेसरों के बच्चों को कॉपी को कोड बताकर प्रवेश में टॉप कराया गया।
साथ ही जिन 102 में से 50 अभ्यर्थियों को 25 अक्तूबर को प्रेजेंटेशन एवं साक्षात्कार के लिए बुलाया गया है, उनमें से कुछ अभ्यर्थी टॉप 50 में नहीं हैं। हालांकि इस पर छात्रों को बताया कि दूसरे चरण में भी अभ्यर्थियों को बुलाया जाएगा लेकिन छात्र यह जानने के लिए अड़े रहे कि टॉप 50 में शामिल कुछ अभ्यर्थियों को पहले चरण में क्यों छोड़ा गया। काफी देर चले हंगामे के बाद छात्रों ने धरना खत्म किया और एचओडी अपने दफ्तर से बाहर निकल सके। छात्रों ने वीसी दफ्तर में भी ज्ञापन देकर मामले की शिकायत दर्ज कराई है। मामले की जांच कराई जाए और इसके बाद प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। हंगामे के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 25 अक्तूबर को प्रस्तावित प्रेजेंटेशन एवं साक्षात्कार स्थगित कर दिया। उधर, एचओडी ने वीसी दफ्तर एवं चीफ प्रॉक्टर को पूरी घटना से अवगत करा दिया है।
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‘क्रेट 2017-18 का अगस्त में ही प्रवेश होना था। ऐसा कोई नियम नहीं है कि क्रेट में शिक्षकों के बच्चे प्रवेश नहीं ले सकते हैं। बच्चे मेधावी हैं और अच्छे नंबर लाते हैं तो चयन होगा ही। इसके बावजूद कुछ छात्रों की शिकायत पर 12 सितंबर को बाहर से दो विशेषज्ञ बुलाकर वीसी के कमेटी हॉल में कॉपियों की जांच दोबारा कराई गई थी। जांच में आरोप सही नहीं पाए गए। इसके बावजूद कुछ छात्र संतुष्ट नहीं हैं तो उनके लिए प्रवेश को ज्यादा दिनों तक टाला नहीं जा सकता। वैसे में प्रवेश में देरी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पिछड़ रही है।’
-प्रो. सिद्धनाथ, विधि के विभागाध्यक्ष