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हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला : आरोपी से कहा सार्वजनिक स्थान पर हफ्ते भर राहगीरों को पिलाओ ठंडा पानी और शरबत

Tue, 24 May 2022 11:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 24 May 2022 11:51 PM IST
सार

  • सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के आरोपी की जमानत मंजूर करते हुए कोर्ट ने दिया आदेश
  • हापुड़ जिले के सिंभावली थाने में दर्ज हुआ था मुकदमा, जिला न्यायालय से जमानत खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में दाखिल की गई अर्जी
  • डीएम और एसपी को मदद के लिए कहा, याची के अधिवक्ता भी होंगे शामिल

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Historic decision of the High Court, asked the accused to give cold water and syrup to passers-by in a public place for a week
इलाहाबाद उच्च न्यायालय

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के आरोपी की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए एतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने याची को हापुड़ के किसी सार्वजनिक स्थान पर राहगीरों को मई या जून के किसी सप्ताह ठंडा पानी और शरबत पिलाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मामले में प्रतिवादी डीएम और एसपी को भी मदद करने के लिए कहा है, जिससे कि यह गतिविधि शांतिपूवर्क बिना किसी बाधा के संचालित हो और इच्छित सद्भावना व सौहार्द उत्पन्न हो सके। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने नवाब की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए दिया है।

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याची के खिलाफ हापुड़ के सिंभवाली थाने में 11 मार्च को एफआईआर दर्ज हुई थी। जिला न्यायालय ने याची की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था। याची ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की। याची की ओर से तर्क दिया कि  चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच विवाद उत्पन्न हुआ था। नारेबाजी के बाद लोग आक्रोशित हुए और विवाद अचानक हिंसक रूप में परिवर्तित हो गया। लेकिन इसमें याची का कोई दोष नहीं है। उसे द्वेषवश फंसाया गया है। घटना में याची की कोई भूमिका नहीं है।
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उसका नाम भी मुख्य आरोपी के तौर पर सामने नहीं आया है। याची के तर्कों से सहमत होते हुए कोर्ट ने कहा कि याची जमानत का हकदार है। कोर्ट ने शर्तों के साथ याची को व्यक्तिगत मुचलके और दो प्रतिभूति के साथ रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही याची को सार्वजनिक स्थान पर राहगीरों और यात्रियों को मई और जून की गर्मी में किसी सार्वजनिक स्थान पर हफ्ते भर तक ठंडा और शरबत पिलाने का निर्देश दिया। कहा कि याची के अधिवक्ता भी उसे कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

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गंगा-जमुनी तहजीब रस्म नहीं, बल्कि एक आत्म शक्ति है, जिसे आचरण में इस्तेमाल किया जाना चाहिए
 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नवाब की जमानत अर्जी मंजूर करते कई विचारकों के कथनों को भी उद्धत किया है। कहा कि गंगा-जमुनी तहजीब बातचीत में मनाई जाने वाली रस्म नहीं है बल्कि वास्तव में यह एक आत्म शक्ति है, जिसे आचरण में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। गंगा-जमुनी तहजीब मतभेदों को सहन करने मात्र के लिए नहीं है बल्कि विविधता का हार्दिक आलिंगन है।

यह उत्तर प्रदेश राज्य का लोकाचार, भारतीय दर्शन की कैथोलिकता को सामने लाता है। कोर्ट ने अपने आदेश में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रॉबर्ट्स और वारेन के कथनों को भी बयां किया है। कोर्ट ने कहा कि अदालतों में कानूनी संवाद भी समाज में विकृत प्रवृत्तियों को रोकने में मदद कर सकते हैं। हिंसा की घटनाएं समाज में असंतोष फैलाती हैं, जो कानून के शासन के साथ असंगत हैं और किसी भी सभ्य राष्ट्र में इसका कोई स्थान नहीं है।

कानून अपना काम करेगा और अपराधियों को न्याय का सामना करना पड़ेगा। कोर्ट ने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा से शांति भंग होती है और समाज में दरार आती है। लोकतंत्र के लिए राजनीति अनिवार्य है लेकिन राजनीति संवाद पर एकाधिकार नहीं कर सकती। समस्या से निपटने के लिए कानून और अदालत ही एकमात्र साधन नहीं हैं। समाज के सभी वर्गों को सभी नागरिकों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देने और शांति सुनिश्चित करने के लिए अपनी जिम्मेदारियों को निभाना होगा। कोर्ट ने अपने आदेश में महात्मा गांधी को भी याद किया है।

कहा है कि गांधी जी ने प्रेम को सभी धर्मों का सार बताया है। कहा कि कई पीढ़ियों ने गुलामी की बेड़ियों से आजादी पाने के लिए अपना खून, पसीना, आंसू और परिश्रम दिया है। संस्थापक पीढ़ियों ने संघर्षों के जरिये देश को आगे बढ़ाया था। इसलिए सभी भारतीयों का कर्तव्य है कि देश को शांत बंदरगाहों में बदल दें। कोर्ट ने कवि प्रदीप की कविता हम लाए हैं, तूफान से किश्ती निकाल के... को भी उद्धत किया है।

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