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गांधी जयंतीः हिंदुस्तानी एकेडेमी अब गांधी सभागार
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Hindustani Academy Allahabad
- फोटो : CITY DESK
हिन्दुस्तानी एकेडेमी एवं कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट की ओर से ‘गाँधी का ग्राम-स्वराज्य: संभावना एवं विकल्प’ पर संगोष्ठी
प्रयागराज। हिन्दुस्तानी एकेडेमी एवं कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट की ओर से गांधी जयंती पर ‘गाँधी का ग्राम-स्वराज्य: संभावना एवं विकल्प’ विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई। एकेडेमी अध्यक्ष डॉ.उदय प्रताप सिंह ने कहा, हिन्दुस्तानी शब्द का प्रयोग गांधी जी ने ही किया था। गांधी जी एक महामानव थे। उनकी यात्रा एक साधारण से असाधारण के मार्ग की यात्रा थी। इस मौके पर उन्होंने हिन्दुस्तानी एकेडेमी सभागार का नामकरण गांधी सभागार करने की घोषणा की।
मुख्य अतिथि प्रो. जनक पाण्डेय ने गांधी जी ने सभी प्रकार के भेदभाव को समाप्त किए जाने की कोशिश की थी। गंाधीवादी चिंतक डॉ.सन्तोष गोईन्दी ने कहा, गंाधी ने जब दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों की अस्मिता के लिए अहिंसक जंग छेड़ी तो कस्तूरबा ने खाना खिलाते समय उनसे कहा ‘आपने इस जंग केलिए महिलाओं का भी आह्वान किया है, फिर हम क्यों नहीं और बाद में कस्तूरबा पहली महिला सत्याग्रही बनीं। समाजसेवी ओमदत्त सिंह ने कहा, गंाधी जी के ग्रामस्वराज के बिना संतुलित समाज की कल्पना नही की जा सकती।
गांधीवादी रामधीरज ने कहा, गांधी जी ने कहा थाहिन्दुस्तान गांव में ही बसता है। मनोज त्यागी ने कहा, गांधी जी कहते थे, अगर भारत पश्चिम के रास्ते पर चला तो उसका विकास हो ही नहीं सकता। श्री बल्लभ ने कहा, गांधी जी का एक सूत्र सत्य और अहिंसा को पकड़ लो तो जीवन सफल हो जाएगा। डॉ.श्लेष गौतम ने सुनाया, ‘राजघाट बस नाम नहीं बापू तेरी समाधि का, हमें पता है यह मन्दिर है भारत की आजादी का।’
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इस दौरान डॉ. सरिता की ओर से संपादित पुस्तक ‘बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की गुलामी के खिलाफ’ का विमोचन भी किया गया। डॉ.सरिता ने ही संचालन किया। कार्यक्रम में रामनरेश तिवारी पिंडीवासा, डॉ एमजे त्रिपाठी, डॉ अनुपम आनंद, श्रीराम मिश्र ‘तलब जौनपुरी, डॉ.शान्ति चौधरी, डॉ.सरोज सिंह, शिवराम उपाध्याय ‘मुकुल मतवाला’, डॉ. अनिल सिंह, विवेक सत्यांशु आदि मौजूद थे।
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प्रयागराज। हिन्दुस्तानी एकेडेमी एवं कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट की ओर से गांधी जयंती पर ‘गाँधी का ग्राम-स्वराज्य: संभावना एवं विकल्प’ विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई। एकेडेमी अध्यक्ष डॉ.उदय प्रताप सिंह ने कहा, हिन्दुस्तानी शब्द का प्रयोग गांधी जी ने ही किया था। गांधी जी एक महामानव थे। उनकी यात्रा एक साधारण से असाधारण के मार्ग की यात्रा थी। इस मौके पर उन्होंने हिन्दुस्तानी एकेडेमी सभागार का नामकरण गांधी सभागार करने की घोषणा की।
मुख्य अतिथि प्रो. जनक पाण्डेय ने गांधी जी ने सभी प्रकार के भेदभाव को समाप्त किए जाने की कोशिश की थी। गंाधीवादी चिंतक डॉ.सन्तोष गोईन्दी ने कहा, गंाधी ने जब दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों की अस्मिता के लिए अहिंसक जंग छेड़ी तो कस्तूरबा ने खाना खिलाते समय उनसे कहा ‘आपने इस जंग केलिए महिलाओं का भी आह्वान किया है, फिर हम क्यों नहीं और बाद में कस्तूरबा पहली महिला सत्याग्रही बनीं। समाजसेवी ओमदत्त सिंह ने कहा, गंाधी जी के ग्रामस्वराज के बिना संतुलित समाज की कल्पना नही की जा सकती।
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गांधीवादी रामधीरज ने कहा, गांधी जी ने कहा थाहिन्दुस्तान गांव में ही बसता है। मनोज त्यागी ने कहा, गांधी जी कहते थे, अगर भारत पश्चिम के रास्ते पर चला तो उसका विकास हो ही नहीं सकता। श्री बल्लभ ने कहा, गांधी जी का एक सूत्र सत्य और अहिंसा को पकड़ लो तो जीवन सफल हो जाएगा। डॉ.श्लेष गौतम ने सुनाया, ‘राजघाट बस नाम नहीं बापू तेरी समाधि का, हमें पता है यह मन्दिर है भारत की आजादी का।’
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इस दौरान डॉ. सरिता की ओर से संपादित पुस्तक ‘बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की गुलामी के खिलाफ’ का विमोचन भी किया गया। डॉ.सरिता ने ही संचालन किया। कार्यक्रम में रामनरेश तिवारी पिंडीवासा, डॉ एमजे त्रिपाठी, डॉ अनुपम आनंद, श्रीराम मिश्र ‘तलब जौनपुरी, डॉ.शान्ति चौधरी, डॉ.सरोज सिंह, शिवराम उपाध्याय ‘मुकुल मतवाला’, डॉ. अनिल सिंह, विवेक सत्यांशु आदि मौजूद थे।