फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Highcourt news: Name of the post appointed for giving pension No, nature of service is important

Highcourt news: पेंशन देने के लिए नियुक्ति पद का नाम नहीं, सेवा की प्रकृति महत्वपूर्ण

Tue, 09 Nov 2021 11:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 09 Nov 2021 11:50 PM IST
विज्ञापन
Highcourt news: Name of the post appointed for giving pension No, nature of service is important
allahabad highcourt - फोटो : prayagraj
 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पेेंशन और सेवानिवृत्ति परिलाभ देने में यह देखा जाना महत्वपूर्ण नहीं है कि कर्मचारी किस पद नाम से सेवा में है, बल्कि उसकी सेवा की प्रकृति के अनुसार पेंशन का निर्धारण किया जाना चाहिए। कोर्ट ने दशकों से सीजनल संग्रह अमीन के पद पर कार्यरत और बाद में नियमित किए गए कर्मचारियों को उनकी सीजनल अमीन पर नियुक्ति की तिथि से दी गई सेवा को जोड़कर पेंशन का भुगतान करने का निर्देश दिया है। 
विज्ञापन



कोर्ट ने कहा कि याचीगण दशकों से सेवाएं दे रहे हैं। वो चाहे दैनिक वेतन भोगी, अस्थायी या किसी और नाम से नियुक्त थे, पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ देने में यह बात मायने नहीं रखती है। कोर्ट का कहना था कि याचीगण सीजनल अमीन के तौर पर वही सेवाएं दे रहे हैं जो नियमित संग्रह अमीन देते हैं। और उनको वह सभी लाभ भी दिए गए हैं जो नियमित कर्मचारी को मिलते हैं। ऐसे हालात में उनको पेंशन देने से इनकार करना न सिर्फ मनमाना है, बल्कि संविधान में दिए समानता के अधिकार के विरुद्ध भी है। 
विज्ञापन



महाराजगंज सदर तहसील में नियुक्ति सीजनल संग्रह अमीन कौशल किशोर चौबे और चार अन्य की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने दिया है। याचीगण का पक्ष रख रहे अधिवक्ता सैय्यद वाजिद अली का कहना था कि याचीगण 1976 से 1990 के बीच सीजनल संग्रह अमीन के तौर पर नियुक्त किए गए। तब से वह लगातार अपनी सेवाएं देते रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन



जिसके चलते सक्षम प्राधिकारी की संस्तुति पर उनको संग्रह अमीन के पद पर नियमित कर दिया गया। उनका वेतन भी नियमित कर्मचारियों की तरह समय समय पर पुनरीक्षित किया गया। मगर रिटायर होने पर उनको पेंशन का लाभ यह कहते हुए देने से इनकार कर दिया गया कि याचीगण को नियमितीकरण की तिथि से ही सेवा में माना जाएगा न कि मूल नियुक्ति की तिथि से। 



सरकारी अधिवक्ता का कहना था कि सीजनल संग्रह अमीन के तौर पर की गई सेवा को नियमित सेवा में जोड़कर पेंशन का लाभ नहीं दिया जा सकता है। दूसरे याचीगण 2005 के बाद नियमित हुए हैं जब पेंशन का प्राविधान बंद कर दिया गया। इसलिए वे पेंशन पाने के हकदार नहीं है। कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना और तीन माह में याचीगण को पेंशन व अन्य लाभ देने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed