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वर्कचार्ज कै डर कर्मियों को पुरानी पेंशन देने का निर्देश
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Highcourt directed to pay old pension in work charge cadre 2005 employees
मौलिक नियुक्ति की तिथि से की गई सेवा की गणना
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2005 में नियुक्त वर्क चार्ज कैडर के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कर्मचारियों की सेवा अवधि की गणना उनकी मूल नियुक्ति की तारीख से करते हुए पेंशन के भुगतान का निर्देश दिया है तथा इस संबंध में एकल न्याय पीठ द्वारा पारित आदेश को रद्द कर दिया है। निसार अहमद व सात अन्य की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सुमित गोपाल की पीठ ने दिया है।
याचीगण का कहना था कि उनकी नियुक्ति वर्क चार्ज कैडर में एक अप्रैल 2005 को की गई तथा एक जनवरी 2006 से उनकी सेवाएं नियमित कर दी गईं। एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन नहीं दी जा रही। याची का कहना था कि उनकी नियुक्ति एक अप्रैल 2005 को हुई है इसलिए वह पुरानी पेंशन के हकदार हैं। इस संबंध में उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। एकलपीठ ने सिविल सर्विस रेगुलेशन धारा 370 के आलोक में याचिका खारिज कर दी।
इस फैसले को विशेष अपील में चुनौती दी गई। याची के अधिवक्ता सैयद फहीम अहमद का कहना था सिविल सर्विस रेगुलेशन 370 की वैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने धारा 370 को रद्द कर दिया है। इसलिए याची की सेवाओं की गणना उनकी मूल नियुक्ति की तारीख एक अप्रैल 2005 से करते हुए उनको पुरानी पेंशन का लाभ दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस दलील को मंजूर करते हुए याचीगण को एक अप्रैल 2005 से सेवा में मानते हुए पेंशन का लाभ देने का निर्देश दिया है, साथ ही एकल पीठ द्वारा पारित आदेश रद्द कर दिया है।
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2005 में नियुक्त वर्क चार्ज कैडर के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कर्मचारियों की सेवा अवधि की गणना उनकी मूल नियुक्ति की तारीख से करते हुए पेंशन के भुगतान का निर्देश दिया है तथा इस संबंध में एकल न्याय पीठ द्वारा पारित आदेश को रद्द कर दिया है। निसार अहमद व सात अन्य की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सुमित गोपाल की पीठ ने दिया है।
याचीगण का कहना था कि उनकी नियुक्ति वर्क चार्ज कैडर में एक अप्रैल 2005 को की गई तथा एक जनवरी 2006 से उनकी सेवाएं नियमित कर दी गईं। एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन नहीं दी जा रही। याची का कहना था कि उनकी नियुक्ति एक अप्रैल 2005 को हुई है इसलिए वह पुरानी पेंशन के हकदार हैं। इस संबंध में उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। एकलपीठ ने सिविल सर्विस रेगुलेशन धारा 370 के आलोक में याचिका खारिज कर दी।
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इस फैसले को विशेष अपील में चुनौती दी गई। याची के अधिवक्ता सैयद फहीम अहमद का कहना था सिविल सर्विस रेगुलेशन 370 की वैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने धारा 370 को रद्द कर दिया है। इसलिए याची की सेवाओं की गणना उनकी मूल नियुक्ति की तारीख एक अप्रैल 2005 से करते हुए उनको पुरानी पेंशन का लाभ दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस दलील को मंजूर करते हुए याचीगण को एक अप्रैल 2005 से सेवा में मानते हुए पेंशन का लाभ देने का निर्देश दिया है, साथ ही एकल पीठ द्वारा पारित आदेश रद्द कर दिया है।
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