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प्रक्रियागत कानून में समय के साथ बदलाव जरूरी: जस्टिस गोगोई
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Sun, 27 Nov 2016 01:04 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट भवन की स्थापना के शताब्दी वर्ष पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए सुप्रीमकोर्ट के जज न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने कहा कि प्रक्रिया गत कानून में समय के अनुसार बदलाव जरूरी है। अदालतों पर मुकदमे का बोझ और आधारभूत ढांचे में कमियों को देखते हुए ऐसा करना जरूरी है। मुकदमों में बार-बार तारीखें लगाने की प्रवृत्ति या कानूनी की जटिल प्रक्रिया का सहारा लेकर मुकदमों के निस्तारण में विलंब करने से बचते हुए ऐसे रास्ते अपनाने होंगे जिससे निस्तारण में तेजी आए।
जस्टिस गोगोई समारोह को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता में समय के अनुसार सुधार होने चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट का गौरवशाली इतिहास रहा है। इसने न्याय जगत को उच्च परंपराएं दी हैं, इसलिए बदलाव की शुरूआत भी यहीं से होने चाहिए। जस्टिस गोगोई ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में नौ लाख से अधिक मुकदमे लंबित हैं। यह संख्या मद्रास हाईकोर्ट से तीन गुना ज्यादा है जहां इलाहाबाद के बाद सबसे ज्यादा मुकदमे हैं। यहां प्रतिवर्ष तीन लाख नए मुकदमे दाखिल होते हैं। इससे जाहिर है कि जज अच्छा काम कर रहे हैं। अदालतों के मूलभूत ढांचे में कमी है। कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सहयोग होना आवश्यक है। उन्होंने कहा न्यायपालिका के मजबूत होने से लोकतंत्र भी मजबूत होगा।
अतीत की परंपराओं को करें याद
जस्टिस गोगोई ने पूर्व महाधिवक्ता पंडित कन्हैयालाल मिश्र का जिक्र करते हुए कहा कि वह ऐसी शख्सियत थे जिनकी अंग्रेजी और कानून के ज्ञान की तारीफ न सिर्फ यहां बल्कि अमेरिका के चीफ जस्टिस ने भी की है। एडवोकेट प्यारेलाल बनर्जी ने अपने मुव्वकिल (गोविंद वल्लभ पंत) के घर जाने से इंकार कर दिया था। उन्होंने वकीलों से पूछा कि क्या आप अपने इतिहास को जानते हैं। उन महान परंपराओं को सहेजने की आवश्यकता है।
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इससे पूर्व समारोह का उद्घाटन जस्टिस गोगोई, जस्टिस आरके अग्रवाल और जस्टिस अशोक भूषण ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। जस्टिस आरके अग्रवाल ने समारोह में बुलाए जाने के लिए आभार जताया। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपने वकालत के दिनों को याद किया। बताया कि यह देश का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय है। इसके फैसलों से न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश की जनता को लाभ हुआ है। न्याय के प्रति जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए हमें अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित परंपराओं और मूल्यों को बरकरार रखना चाहिए।
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जस्टिस गोगोई समारोह को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता में समय के अनुसार सुधार होने चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट का गौरवशाली इतिहास रहा है। इसने न्याय जगत को उच्च परंपराएं दी हैं, इसलिए बदलाव की शुरूआत भी यहीं से होने चाहिए। जस्टिस गोगोई ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में नौ लाख से अधिक मुकदमे लंबित हैं। यह संख्या मद्रास हाईकोर्ट से तीन गुना ज्यादा है जहां इलाहाबाद के बाद सबसे ज्यादा मुकदमे हैं। यहां प्रतिवर्ष तीन लाख नए मुकदमे दाखिल होते हैं। इससे जाहिर है कि जज अच्छा काम कर रहे हैं। अदालतों के मूलभूत ढांचे में कमी है। कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सहयोग होना आवश्यक है। उन्होंने कहा न्यायपालिका के मजबूत होने से लोकतंत्र भी मजबूत होगा।
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अतीत की परंपराओं को करें याद
जस्टिस गोगोई ने पूर्व महाधिवक्ता पंडित कन्हैयालाल मिश्र का जिक्र करते हुए कहा कि वह ऐसी शख्सियत थे जिनकी अंग्रेजी और कानून के ज्ञान की तारीफ न सिर्फ यहां बल्कि अमेरिका के चीफ जस्टिस ने भी की है। एडवोकेट प्यारेलाल बनर्जी ने अपने मुव्वकिल (गोविंद वल्लभ पंत) के घर जाने से इंकार कर दिया था। उन्होंने वकीलों से पूछा कि क्या आप अपने इतिहास को जानते हैं। उन महान परंपराओं को सहेजने की आवश्यकता है।
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इससे पूर्व समारोह का उद्घाटन जस्टिस गोगोई, जस्टिस आरके अग्रवाल और जस्टिस अशोक भूषण ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। जस्टिस आरके अग्रवाल ने समारोह में बुलाए जाने के लिए आभार जताया। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपने वकालत के दिनों को याद किया। बताया कि यह देश का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय है। इसके फैसलों से न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश की जनता को लाभ हुआ है। न्याय के प्रति जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए हमें अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित परंपराओं और मूल्यों को बरकरार रखना चाहिए।