फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   high court

लोक अदालत के आदेश का लाभ दूसरे भी पाने के हकदार

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Wed, 20 May 2020 06:13 PM IST
विज्ञापन
high court
प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण के मामले में लोक अदालत द्वारा पुनर्निर्धारित मुआवजे का लाभ उसी अधिसूचना के तहत अधिग्रहित की गई अन्य भूमि के स्वामियों को भी मिलेगा, भले ही वह स्वयं लोक अदालत नहीं गए थे। कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 की धारा 28 ए में स्पष्ट प्रावधान है कि मुआवजे के पुनर्निर्धारण का लाभ उन सभी को मिलेगा जिनकी जमीने एक ही अधिसूचना द्वारा अधिग्रहित की गई है ।\nकोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर के दादरी तहसील के अली वर्दी पुर गांव के शमशाद अली और कई अन्य किसानों की याचिकाएं मंजूर करते हुए दिया है। कोर्ट ने जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर को निर्देश दिया है कि याची गण को लोक अदालत द्वारा बढ़ा हुआ मुआवजा देने के मामले में तीन माह में नए सिरे से आदेश पारित करें ।\nकोर्ट ने जिलाधिकारी के 19 मई 2018 के आदेश को रद्द कर दिया है। जिसमें उन्होंने याची गण को बढ़ा हुआ मुआवजा देने से इनकार कर दिया था। याचिका पर न्यायमूर्ति अमित बी स्थालेकर और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई। याची का कहना था की उनकी जमीनें नोएडा के विकास हेतु 20 रुपए प्रति स्क्वायर यार्ड मुआवजा की दर पर अधिग्रहित की गई। एक व्यक्ति यूनुस ने मुआवजे की राशि पर असंतोष जताते हुए जिलाधिकारी गौतम बुध नगर को भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 18 के तहत रेफरेंस के लिए अर्जी दी । डीएम ने मामला सिविल कोर्ट को अग्रसारित कर दिया । सिविल कोर्ट ने इसे लोक अदालत को रेफर करते हुए तय करने के लिए कहा । लोक अदालत ने दोनों पक्षकारों के बीच सहमति के आधार पर मुआवजे की राशि बढ़ाकर 297.50 रुपये प्रति स्क्वायर यार्ड कर दी ।याची गण को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने लोक अदालत द्वारा पुनर्निर्धारित दर पर मुआवजा दिए जाने के लिए जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर को अर्जी दी। जिलाधिकारी ने यह कहते हुए उनकी अर्जी खारिज कर दी कि लोक अदालत का आदेश उनके लिए नहीं है तथा यह सेक्शन 18 के तहत रिफरेंस दाखिल करने वाले व्यक्ति को ही मिलेगा। इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई ।याची गण की ओर से कहा गया कि लोक अदालत की अधिकारिता सिविल कोर्ट के समान है तथा उसके द्वारा पारित डिक्री अंतिम होती है । जिसके खिलाफ अपील नहीं दाखिल हो सकती ।तथा इस आदेश का लाभ याचीगण भी पाने के अधिकारी है। क्योंकि उनकी भी जमीने उसी अधिसूचना के द्वारा अधिग्रहित की गई है।\n जबकि प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया की स्थाई लोक अदालत 'अदालत' नहीं है तथा उसके द्वारा पारित आदेश का लाभ याची गण को नहीं मिलेगा कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए याची गण को बढ़े हुए दर से मुआवजे का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed