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ध्वस्तीकरण के खिलाफ अर्जी पर देर रात बैठी अदालत
Thu, 09 Jul 2020 03:40 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2020 03:40 PM IST
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- फोटो : court
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मकान का ध्वस्तीकरण रोकने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाइकोर्ट की खण्डपीठ आठ जुलाई को देर रात बैठी। वकीलो की ओर से दी गई अर्जेंसी की अर्जी पर रात पौने दस बजे सुनवाई शुरू हुई। फतेहपुर, सिविल लाइन्स स्थित जिलाधिकारी के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति मनोज मिश्र तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई की।
हालांकि कोर्ट ने याची के पक्ष में तत्काल कोई अंतरिम आदेश देने से इंकार कर दिया और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा है। याची अजय कुमार व 3अन्य की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेन्द्र नाथ सिंह व मिथिलेश कुमार तिवारी ने अर्जेन्सी अर्जी दाखिल कर तुरंत सुनवाई की मांग की।
इनका कहना है कि याची ने विश्वरूप वर्मा से 2009 में विवादित मकान खरीदा है। भूमि विवाद को लेकर मुकदमा विचाराधीन है। डॉ अशोक कुमार सिंह की अर्जी पर जिलाधिकारी फतेहपुर ने 18 जून20 को एस डी एम को आदेश दिया,कि वह सुनिशित करे कि निर्माण के समय अप्रिय घटना न होने पाये । जिसके तहत 8 जुलाई को ध्वस्तीकरण कार्रवाई शुरू हुई।जिसे चुनौती दी गयी है।
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मुख्य स्थायी अधिवक्ता जे एन मौर्य ने कोर्ट को बताया कि विपक्षी डॉ अशोक के पक्ष में फाइनल डिक्री है।जिससे निर्माण पर लगी रोक हट गई है। ऐसे में डिक्री के,आधार पर निर्माण मे कानूनी अडचन नही है। याचिका पोषणीय नहीं है। याची अधिवक्ता का कहना था कि डिक्री के खिलाफ पुनरीक्षण अर्जी दाखिल की गई है। जिस पर अंतरिम आदेश भी प्राप्त हुआ था।
अशोक सिंह ने याचिका दायर कर एकपक्षीय आदेश प्राप्त कर लिया है। और विवादित भूमि पर निर्माण करा,रहे है। जिलाधिकारी को सिविल मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। \nइस पर कोर्ट ने कहा कि ध्वस्तीकरण हो चुका है। दोनो पक्षों को सुनकर आदेश दिया जाना उचित होगा।कोर्ट ने विपक्षियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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हालांकि कोर्ट ने याची के पक्ष में तत्काल कोई अंतरिम आदेश देने से इंकार कर दिया और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा है। याची अजय कुमार व 3अन्य की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेन्द्र नाथ सिंह व मिथिलेश कुमार तिवारी ने अर्जेन्सी अर्जी दाखिल कर तुरंत सुनवाई की मांग की।
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इनका कहना है कि याची ने विश्वरूप वर्मा से 2009 में विवादित मकान खरीदा है। भूमि विवाद को लेकर मुकदमा विचाराधीन है। डॉ अशोक कुमार सिंह की अर्जी पर जिलाधिकारी फतेहपुर ने 18 जून20 को एस डी एम को आदेश दिया,कि वह सुनिशित करे कि निर्माण के समय अप्रिय घटना न होने पाये । जिसके तहत 8 जुलाई को ध्वस्तीकरण कार्रवाई शुरू हुई।जिसे चुनौती दी गयी है।
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मुख्य स्थायी अधिवक्ता जे एन मौर्य ने कोर्ट को बताया कि विपक्षी डॉ अशोक के पक्ष में फाइनल डिक्री है।जिससे निर्माण पर लगी रोक हट गई है। ऐसे में डिक्री के,आधार पर निर्माण मे कानूनी अडचन नही है। याचिका पोषणीय नहीं है। याची अधिवक्ता का कहना था कि डिक्री के खिलाफ पुनरीक्षण अर्जी दाखिल की गई है। जिस पर अंतरिम आदेश भी प्राप्त हुआ था।
अशोक सिंह ने याचिका दायर कर एकपक्षीय आदेश प्राप्त कर लिया है। और विवादित भूमि पर निर्माण करा,रहे है। जिलाधिकारी को सिविल मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। \nइस पर कोर्ट ने कहा कि ध्वस्तीकरण हो चुका है। दोनो पक्षों को सुनकर आदेश दिया जाना उचित होगा।कोर्ट ने विपक्षियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।