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UP : हाईकोर्ट ने तलब की मेरठ के मदरसा छात्रवृत्ति घोटाले की जानकारी, उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक
Fri, 02 Feb 2024 01:08 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 02 Feb 2024 01:08 PM IST
सार
मामला मेरठ जिले का है। वर्ष 2010 में सरकार द्वारा मदरसों की प्रबंध समिति के खाते में छात्रवृत्ति की मद में चार करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। जिसके वितरण में बरती गई अनियमितता के कारण तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुमन गौतम और कार्यालय के लिपिक संजय त्यागी समेत कई मदरसा संचालकों के खिलाफ 98 मुकदमे दर्ज किए गए थे।
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अदालत।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ के मदरसों में छात्रवृत्ति वितरण को लेकर 13 साल पहले हुए घोटाले में आरोपी बागपत की जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुमन गौतम को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ किसी भी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए सरकार से दो हफ्ते में मामले की पूरी जानकारी तलब की है। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की अदालत ने याची की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र पर याची के अधिवक्ता सुनील चौधरी को सुन कर दिया।
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मामला मेरठ जिले का है। वर्ष 2010 में सरकार द्वारा मदरसों की प्रबंध समिति के खाते में छात्रवृत्ति की मद में चार करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। जिसके वितरण में बरती गई अनियमितता के कारण तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुमन गौतम और कार्यालय के लिपिक संजय त्यागी समेत कई मदरसा संचालकों के खिलाफ 98 मुकदमे दर्ज किए गए थे। मामले की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन मेरठ को सौंपी गई है।
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इस चर्चित घोटाले में आरोपी सुमन गौतम मौजूदा समय में बागपत जिले में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात हैं। गिरफ्तारी से बचने की लिए उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याची के अधिवक्ता सुनील चौधरी का कहना है कि मेरठ में तैनाती के दौरान याची अधिकारी ने खुद इस मामले में छह मदरसा संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा कर गबन की गई धनराशि की वसूली की कार्रवाई की थी।
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उन्होंने यह भी दलील दी कि वर्ष 2010 में छात्रवृत्ति की राशि सीधे प्रबंध तंत्र के खाते में भेजी जाती थी, प्रबंध तंत्र द्वारा ही छात्रवृत्ति का वितरण किया जाता था, जबकि वर्ष 2014 से यह राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजी जाने लगी। इससे स्पष्ट है कि धनराशि के लेनदेन में प्रत्यक्ष रूप से याची की कोई भूमिका नहीं थी। कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए बागपत की जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुमन गौतम के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए सरकार से दो हफ्ते में पूरी जानकारी तलब की है।