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हाईकोर्ट : लोन राशि के दोगुने से अधिक वसूली पर एकल पीठ की ओर से लगाई गई रोक स्थगित

Thu, 01 Oct 2026 04:02 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 01 Oct 2026 04:02 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उधारकर्ताओं से मूल लोन राशि के दोगुने से अधिक वसूली न करने के एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही प्रतिवादियों को छह सप्ताह में जवाब देने के लिए नोटिस दिया है।

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High Court: Stay imposed by the Single Bench on the recovery of an amount exceeding double the loan value has
अदालत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उधारकर्ताओं से मूल लोन राशि के दोगुने से अधिक वसूली न करने के एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही प्रतिवादियों को छह सप्ताह में जवाब देने के लिए नोटिस दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड की ओर से दाखिल विशेष अपील पर दिया है। उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड ने एकल पीठ के 22 जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में एकल पीठ ने बैंकों पर मूल ऋण राशि के दोगुने से अधिक की वसूली करने पर रोक लगा दी थी।

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अपीलकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि उधारकर्ता ने केवल किस्तों में बकाया राशि के भुगतान की अनुमति मांगने के लिए याचिका किया था। इसके बावजूद एकल पीठ ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए वैधानिक प्रावधानों के विपरीत निर्देश जारी कर दिए। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला दिया। कहा कि अदालतों को याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर ही फैसला सुनाना चाहिए।
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एकल पीठ के आदेश पर प्रतिवादी पक्ष व राज्य की ओर से कोर्ट को जानकारी दी गई। बताया कि उधारकर्ताओं के हित और विधायी आवश्यकताओं को देखते हुए विभाग की ओर से 16 मई 2026 को एक समिति का गठन किया गया था। एकल पीठ का मानना था कि जब तक समिति समीक्षा पूरी कर सरकार को अपनी सिफारिशें नहीं सौंप देती, तब तक बैंकों को मूल राशि के दोगुने से अधिक की वसूली रोक देनी चाहिए।
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साथ ही किस्तों में भुगतान के अनुरोध पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए। खंडपीठ ने कहा कि जब समिति केवल विधायी बदलावों के सुझाव के लिए बनी है तो वर्तमान कानून और लोन समझौते के तहत वसूली बाधित नहीं है।


महोबा के बैजनाथ ने भैंस के लिए लिया था ऋण

महोबा निवासी बैजनाथ ने उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक से भैंस के लिए 50 हजार रुपये ऋण लिया था। कर्ज बढ़कर ब्याज सहित करीब 3.50 लाख रुपये हो गया। बैंक ने जमीन नीलाम करने के लिए नोटिस जारी किया तो याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने एक समिति गठित करने का निर्देश दिया था। साथ ही समिति की सिफारिशें प्रस्तुत करने तक दोगुनी राशि वसूलने पर रोक लगा दी थी।

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