High Court : रोडवेज अधिकारियों के अपीलीय व पुनरीक्षण आदेश के खिलाफ विशेष अपील पोषणीय
सेवा समाप्ति के खिलाफ याची ने राज्य परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक, प्रयागराज के यहां अपील दाखिल की, जो 12 नवंबर 2020 को खारिज कर दी गई। इसके खिलाफ याची ने अध्यक्ष के समक्ष पुनरीक्षण दाखिल की, वह भी 12 जनवरी 2021 को खारिज कर दी गई।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने जागेश्वर प्रसाद तिवारी और मदन पाल सिंह के मामले में पारित खंडपीठ के फैसले पर मुहर लगा दी है। कहा कि राज्य सड़क परिवहन निगम कर्मचारी (अधिकारी के अलावा) सेवा विनियम, 1981 के तहत पारित अपीलीय और पुनरीक्षण आदेश के खिलाफ विशेष अपील में पोषणीय है।
यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति विकास बुधवार की पूर्ण पीठ ने बर्खास्त परिचालक राजित राम यादव की ओर से दाखिल विशेष अपील की पोषणीयता को लेकर पूछे गए विधिक सवालाें का उत्तर देते हुए की है। पांच अक्तूबर 2019 को रोडवेज में कार्यरत परिचालक राजित राम यादव की सेवा समाप्त कर दी गई थी।
सेवा समाप्ति के खिलाफ याची ने राज्य परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक, प्रयागराज के यहां अपील दाखिल की, जो 12 नवंबर 2020 को खारिज कर दी गई। इसके खिलाफ याची ने अध्यक्ष के समक्ष पुनरीक्षण दाखिल की, वह भी 12 जनवरी 2021 को खारिज कर दी गई। याची ने सभी आदेशों के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने याचिका को पोषपीयता के आधार पर खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याची के पास अन्य उपचार उपलब्ध है, इसलिए अनुच्छेद 226 के तहत याचिका पोषणीय नहीं है।
एकल पीठ के आदेश के खिलाफ याची ने विशेष अपील दाखिल की। विभाग के वकील ने आरएम बनाम अभय राज सिंह का हवाला देते हुए विशेष अपील की पोषणीयता पर सवाल उठाया। कहा कि हाईकोर्ट रूल में निहित अपवादों को देखते हुए विशेष अपील सुनवाई योग्य नहीं होगी। जबकि, याची की ओर से दलील पेश करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता समीर शर्मा ने जागेश्वर प्रसाद तिवारी और मदन पाल सिंह के मामले में स्थापित विधि व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए स्पेशल अपील को पोषणीय बताया।
दोनों पक्षों की ओर से हाईकोर्ट की खंडपीठ की ओर से पारित दोनों विरोधाभाषी नजीरों की विधिक स्थिति स्पष्ट करने के लिए मौजूदा मामले की सुनवाई कर रही खंडपीठ ने मामले को तीन जजों की पूर्ण पीठ को संदर्भित किया था। पूर्ण पीठ ने अभय राज सिंह के मामले के मुताबिक विशेष अपील को सुनवाई योग्य न मानने की व्याख्या को गलत माना। जबकि, जागेश्वर प्रसाद तिवारी और मदन पाल सिंह के मामले दी गई विधि व्यवस्था पर मुहर लगाते हुए कहा कि राज्य सड़क परिवहन निगम कर्मचारी (अधिकारी के अलावा) सेवा विनियम, 1981 के तहत पारित अपीलीय और पुनरीक्षणीय आदेश को चुनौती देने वाली एकल पीठ के आदेश के खिलाफ विशेष अपील पोषणीय है। कोर्ट ने मामले के त्वरित निस्तारण के लिए पत्रावलियों को संबधित पीठ के पास वापस प्रेषित कर दिया।