High Court : गैंगस्टर मामले में मुख्तार अंसारी को झटका, दो वर्ष पूर्व दर्ज केस में जमानत देने से किया इन्कार
कोर्ट ने कहा, समाज में भय फैलाने के उद्देश्य से उसके गैंग के सदस्यों ने बिना भेदभाव अवैध स्वचालित हथियारों से गोली चलाई थी। यह फायरिंग गरीब कर्मकारों पर की गई थी। इसकी वजह से एक की मौत हो गई थी जबकि कई घायल हो गए थे।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट से बाहुबली मुख्तार अंसारी को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने मुख्तार अंसारी की जमानत अर्जी खारिज करते हुए उसे नामचीन तथा उत्तर भारत में राबिन हुड छबि वाला अपराधी बताया। कोर्ट ने याची के गैंग चार्ट तथा दर्ज आपराधिक मुकदमों को देखने के बाद कहा, अगर याची गैंगस्टर नहीं है तो देश में किसी को भी गैंगस्टर नहीं कहा जा सकता है।
मुख्तार ने गैंगस्टर एक्ट की धारा तीन (एक) के तहत थाना तरवां, जिला आजमगढ़ में 2020 में दर्ज प्राथमिकी में जमानत की मांग की थी। याची केअधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने कोर्ट से जमानत अर्जी वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे कोर्ट ने सही नहीं माना। कोर्ट ने मुख्तार की जमानत अर्जी को गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने मुख्तार की जमानत अर्जी पर पारित किया।
याची के अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने कहा, उसे इस जमानत अर्जी को वापस लेने को कहा गया है। इसलिए वह अर्जी वापस लेना चाहता है। परंतु कोर्ट ने इसे अनुचित माना और कहा, यह नहीं बताया गया कि याची भविष्य में दोबारा जमानत अर्जी दाखिल नहीं करेगा। लिहाजा, उसकी अर्जी वापस लेने की मांग को अस्वीकार किया जाता है।/कोर्ट ने कहा, याची गैंग का लीडर है। इसके खिलाफ 58 आपराधिक केस दर्ज हैं और डीएम ने गैंग चार्ट अनुमोदित किया है। लोग इसकेकिसी केस में भय से गवाही देने नहीं जाते। इसी की वजह से उसे किसी केस में सजा नहीं मिली।
कोर्ट ने कहा, मुख्तार और उसकेगैंग के सदस्यों ने लोगों में डर और आतंक फैलाकर अकूत धन अर्जित किया है। उसका स्वतंत्र होना कानून का पालन करने वालों के लिए खतरा है। कोर्ट ने कहा, समाज में भय फैलाने के उद्देश्य से उसके गैंग के सदस्यों ने बिना भेदभाव अवैध स्वचालित हथियारों से गोली चलाई थी। यह फायरिंग गरीब कर्मकारों पर की गई थी।
इसकी वजह से एक की मौत हो गई थी जबकि कई घायल हो गए थे।
यह घटना समाज में आतंक व भय फैलाने के लिए की गई थी। ताकि, कोई भी उस क्षेत्र में सरकारी ठेका न ले सके। कोर्ट ने कहा, याची केआपराधिक इतिहास पर विचार करने पर पता चलता है कि अधिकतर मुकदमों में वह बरी है। उसका कारण है कि गवाह उसके डर तथा आतंक से या तो गवाह गवाही से मुकर जाते हैं या उन्हें खत्म कर दिया जाता है। इस आधार पर कोर्ट ने याची की जमानत खारिज कर दी।