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हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी : प्रदेश में मानवाधिकार की हालत खस्ता, पुलिस की बेपरवाही शर्मनाक
Sun, 08 Nov 2026 03:41 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 08 Nov 2026 03:41 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश में नागरिक स्वतंत्रता की हालत खस्ता है, जो बेहद शर्मनाक है। थानों के सीसीटीवी फुटेज पेश करने में आनाकानी नागरिकों के मौलिक अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता के प्रति पुलिस की बेपरवाही की कहानी बयां करती है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश में नागरिक स्वतंत्रता की हालत खस्ता है, जो बेहद शर्मनाक है। थानों के सीसीटीवी फुटेज पेश करने में आनाकानी नागरिकों के मौलिक अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता के प्रति पुलिस की बेपरवाही की कहानी बयां करती है। इस तल्ख टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने अफजल अहमद की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर बिजनौर पुलिस पर 20 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। साथ ही अवैध हिरासत में लिए गए याची को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।
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याची की बेटी ने आरोप लगाया कि पांच सितंबर को सादे कपड़ों में पहुंचे पुलिसकर्मी और एसओजी के सदस्यों ने थाने के गेट के पास से उनके पिता को घेरकर उनकी गाड़ी से उठा लिया था। वहीं, उनकी गिरफ्तारी सात सितंबर को दर्शायी गई। मामले की सच्चाई जानने के लिए कोर्ट ने पांच सितंबर दोपहर एक से सात सितंबर सुबह 10 बजे तक का सीसीटीवी फुटेज तलब किया था।
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पुलिस ने फुटेज उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई। दलील दी कि आंधी-तूफान के दौरान पानी केबल के जरिये सीसीटीवी सिस्टम में पहुंच गया था, जिससे रिकॉर्डिंग व्यवस्था खराब हो गई। कोर्ट ने कहा कि जब भी सीसीटीवी फुटेज मांगा जाता है तो किसी न किसी कारण से उसके उपलब्ध न होने की रिपोर्ट सामने आ जाती है।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अवैध हिरासत के मामलों में सीसीटीवी खराब होने का बहाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में फुटेज जानबूझकर छिपाने की आशंका को भी गंभीरता से देखा जा सकता है। कोर्ट ने संबंधित थाना प्रभारी अन्नू कुमारी की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उनके सर्विस रिकॉर्ड में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने का आदेश दिया है।