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हाईकोर्ट ने कहा : पत्नी जागीर नहीं, गुलाम बनाने की मानसिकता से बाहर निकलें, पति की याचिका खारिज

Thu, 02 Jan 2025 07:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 02 Jan 2025 07:59 PM IST
सार

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने मिर्जापुर निवासी बृजेश यादव की ओर से जिला अदालत में लंबित आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया है। मामला मिर्जापुर की चुनार कोतवाली थाना क्षेत्र का है। रोशनहर अहरौरा निवासी बृजेश यादव की शादी रामपुर कोलना में हुई थी।

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High Court said: Wife is not a property, get out of the mentality of making her a slave
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अंतरंग वीडियो सोशल मीडिया पर किया वायरल

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी के बगैर सहमति के उसके अंतरंग वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के आरोपी युवक की याचिका खारिज कर दी। कहा कि पत्नी जागीर नहीं है, पति विक्टोरियन युग की मानसिकता त्याग दें। अब दौर बदल गया है, पत्नी का शरीर, उसकी गोपनीयता और उसके अधिकार अपने हैं। पति उनका मालिक नहीं है।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने मिर्जापुर निवासी बृजेश यादव की ओर से जिला अदालत में लंबित आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया है। मामला मिर्जापुर की चुनार कोतवाली थाना क्षेत्र का है। रोशनहर अहरौरा निवासी बृजेश यादव की शादी रामपुर कोलना में हुई थी।

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नौ जुलाई 2023 को पत्नी ने बृजेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। आरोप लगाया कि उसने मुकदमेबाजी की रंजिश में उसके अंतरंग वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए हैं। इससे उसकी प्रतिष्ठा को आघात पहुंचा है। पुलिस ने विवेचना के बाद पति के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में आईटी एक्ट की धाराओं में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। कोर्ट ने समन जारी कर पति को तलब किया। इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़िता कानूनी तौर पर उसकी विवाहित पत्नी है। अंतरंगता उसका अधिकार है। लिहाजा, आईटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमा रद्द किया जाना चाहिए। कोर्ट ने दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। कहा कि पत्नी का शरीर उसकी अपनी संपत्ति है। उसके निजी जीवन से जुड़ी हर बात में उसकी सहमति जरूरी है।

विवाह एक पवित्र रिश्ता है। विश्वास उसकी नींव है। खुद को पत्नी का मालिक मान कर फेसबुक पर अंतरंग वीडियो अपलोड कर वैवाहिक रिश्ते की पवित्रता को भंग नहीं किया जा सकता। पत्नी पति से अपेक्षा करती है कि वह उसके समर्पण और भरोसे का सम्मान करे।

कोर्ट ने फैसले में कहा कि एक दौर था, जब विवाह के बाद महिला की कानूनी पहचान पति के अधीन कर दी जाती थी। अब ये धारणाएं सैद्धांतिक रूप से फीकी पड़ गई हैं, लेकिन उनके अवशेष बचे हैं। पत्नी की शारीरिक स्वायत्तता और गोपनीयता का सम्मान करना न केवल पति का कानूनी दायित्व है, बल्कि समानता को बढ़ावा देने की नैतिक अनिवार्यता भी है।

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