हाईकोर्ट ने कहा : सौ से अधिक गैर जमानती वारंट का निस्तारण न करना खतरनाक मिसाल
कोर्ट ने कहा कि गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे व्यक्तियों को कानूनी जवाबदेही से बचने की अनुमति देकर हम कानून के शासन के प्रति दंडमुक्त और अनादर की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की पीठ ने यह फैसला सुनाया।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ के विधायक रफीक अंसारी को राहत देने से इन्कार कर दिया। उन्होंने हाईकोर्ट में ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी किए गए गैरजमानती वारंट व मुकदमे को रद्द करने की अर्जी दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सौ से अधिक जारी गैर जमानती वारंट का निस्तारण न करना, उन्हें विधानसभा सत्र में भाग लेने की अनुमति देना एक खतरनाक और गंभीर मिसाल है।
कोर्ट ने कहा कि गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे व्यक्तियों को कानूनी जवाबदेही से बचने की अनुमति देकर हम कानून के शासन के प्रति दंडमुक्त और अनादर की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की पीठ ने यह फैसला सुनाया।
इस मामले में मेरठ के विधायक रफीक अंसारी पर पुलिस स्टेशन नौचंदी, जिला मेरठ में 1995 में दंगे फैलाने के आरोप सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने आवेदक के उपस्थित न होने पर 18 दिसंबर 1997 को गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसके बाद बार-बार गैर जमानती वारंट किया गया, लेकिन आवेदक कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ। वहीं, आवदेक ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर पूरी प्रक्रिया को रद्द करने की गुहार लगाई।
आवेदक के अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले में आरोप पत्र में जिन 22 आरोपियों को आरोपी बनाया गया था, उन्हें 15 मई 1997 के आदेश से मुकदमे का सामना करने के बाद बरी कर दिया गया है। इसलिए आवेदक पर की गई कार्यवाही भी रद्द की जा सकती है। शासकीय अधिवक्ता ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए तर्क दिया कि इस आवेदन के माध्यम से आवेदक की ओर से मांगी गई राहत खारिज करने योग्य है।
कोर्ट ने आवेदक की अर्जी खारिज कर दी। साथ ही रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया कि इसकी आदेश की कॉपी प्रमुख सचिव, यूपी विधान सभा के अध्यक्ष को भेजा जाए। साथ ही कहा कि पुलिस महानिदेशक विधायक रफीक अंसारी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी किए गए गैर जमानती वारंट का तामीला सुनिश्चित करेंगे।