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हाईकोर्ट ने कहा : भूतलक्षी कानून बनाकर नहीं छीन सकते कानूनी अधिकार, राज्य सरकार की विशेष अपील खारिज
Fri, 02 Feb 2024 01:37 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 02 Feb 2024 01:37 PM IST
सार
मामले में याची विपक्षी महेश चंद्र शर्मा की किसान इंटर काॅलेज तहापुर अमरोहा में अंशकालिक रिक्त पद पर तदर्थ रूप में 14 जनवरी 93 को नियुक्त हुए। बाद में 22 मार्च 16 से नियमित कर दिया गया और वह 31 मार्च 20 को सेवानिवृत्त हो गए।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कानून से निहित अधिकार भूतलक्षी कानून से छीना नहीं जा सकता। यदि सहायक अध्यापक की सेवानिवृत्ति के समय तदर्थ सेवाओं को पेंशन निर्धारण के लिए क्वालीफाइंग सेवा में शामिल करने का नियम रहा है तो बाद में नियम संशोधित कर पूर्व की अवधि से लागू करने के कारण इस अधिकार को छीना नहीं जा सकता। कोर्ट ने तदर्थ सेवा जोड़कर सेवानिवृत्त सहायक अध्यापक के पेंशन निर्धारित करने के एकलपीठ के आदेश को सही माना और राज्य सरकार की विशेष अपील खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति एस क्यू एच रिजवी की खंडपीठ ने राज्य सरकार की एकलपीठ के फैसले के खिलाफ दाखिल विशेष अपील को खारिज करते हुए दिया है।
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मामले में याची विपक्षी महेश चंद्र शर्मा की किसान इंटर काॅलेज तहापुर अमरोहा में अंशकालिक रिक्त पद पर तदर्थ रूप में 14 जनवरी 93 को नियुक्त हुए। बाद में 22 मार्च 16 से नियमित कर दिया गया और वह 31 मार्च 20 को सेवानिवृत्त हो गए। पेंशन निर्धारित करने के लिए याची की तदर्थ सेवा जोड़ने की मांग अस्वीकार कर दी गई। हाईकोर्ट ने इस आदेश को रद्द कर तदर्थ सेवा जोड़कर पेंशन निर्धारित करने का निर्देश दिया, जिसे चुनौती दी गई थी। याची विपक्षी अधिवक्ता का कहना था कि सरकार अपने कानून व नियम को मानने के लिए बाध्य है। भूतलक्षी कानून से विधिक अधिकार नहीं छीने जा सकते।
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