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हाईकोर्ट ने कहा : स्वीकृत अवकाश की अवधि डयूटी से अनाधिकृत अनुपस्थिति नहीं, सेवा बहाली का आदेश

Sat, 21 Oct 2023 03:38 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 21 Oct 2023 03:38 PM IST
सार

यह फैसला न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की एकल पीठ ने सेवामुक्त हुए एनटीपीसी के प्रशिक्षु विभूषित सिंह की सेवाओं को वरिष्ठता के साथ बहाल करने का आदेश देते हुए सुनाया। याची विभूषित सिंह की नियुक्ति सोनभद्र के रिहंद नगर स्थित एनटीपीसी में प्रशिक्षु के रूप में वर्ष 2012 में हुई थी।

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High Court said: Approved leave period is not unauthorized absence from duty
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नियोक्ता को स्वीकृत अवकाश की अवधि को डयूटी से अनाधिकृत अनुपस्थिति मानने का कोई अधिकार नहीं है। हलांकि, नियोक्ता को छुट्टी की शर्तों के अनुसार कर्मचारी की वित्तीय परिलब्धियों में कटौती का अधिकार जरूर है।

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यह फैसला न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की एकल पीठ ने सेवामुक्त हुए एनटीपीसी के प्रशिक्षु विभूषित सिंह की सेवाओं को वरिष्ठता के साथ बहाल करने का आदेश देते हुए सुनाया। याची विभूषित सिंह की नियुक्ति सोनभद्र के रिहंद नगर स्थित एनटीपीसी में प्रशिक्षु के रूप में वर्ष 2012 में हुई थी। प्रशिक्षण के दौरान याची ने एमटेक की पढ़ाई के लिए दो वर्ष का वेतन विहीन अध्ययन अवकाश लिया था।

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एमटेक पाठ्यक्रम के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में वह व्यक्तिगत कारणों से शामिल नहीं हुआ, इसी दौरान वर्ष 2018 में उसने विवाह भी किया। अध्ययन अवकाश की अवधि खत्म होने पर नौकरी पर लौटा तो विभाग ने उसे पदमुक्त मानते हुए ज्वाइन कराने से इन्कार कर दिया।

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सेवामुक्ति के खिलाफ याची ने सक्षम अधिकारी के समक्ष अपील दाखिल की, जो पोषणीयता के आधार पर यह कहते हुए खारिज कर दी गई कि यासी संस्थान सा स्थायी कर्मचारी नहीं है। सेवामुक्ति और अपीलीय अधिकारी के आदेश को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची की ओर से पेश अधिवक्ता की दलील थी कि अध्ययन अवकाश सेवा शर्तों के अनुसार दिया गया था।


शर्तों में पाठ्यक्रम की सफलता या असफलता की शर्त नहीं थी। याची अवकाश अवधि पूर्ण होने के बाद पुन: काम पर लौट आया था। अध्ययन अवकाश के दौरान पाठ्यक्रम की असफलता किसी कर्मचारी की सेवामुक्ति का आधार नहीं हो सकती।

जबकि एनटीपीसी की ओर से अधिवक्ता नरेश चंद्र निषाद का कहना था कि याची अस्थायी सेवा में था। याची ने परवीक्षा काल में अध्ययन अवकाश पढ़ाई के लिए लिया लेकिन पाठ्यक्रम पूर्ण नहीं किया। संस्थान द्वारा स्वीकृत अवकाश का दुरुपयोग किया है। इस अवधि में अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के कारण पदमुक्त किए जाने का आदेश विधि सम्मत है।


कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए याची को वरिष्ठता और सेवा की निरंतरता के साथ तत्काल प्रभाव से बहाल करने का आदेश दिया। साथ ही नियोक्ता को वित्तीय परिलब्धियों में कटौती की इजाजत भी दी।

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